मां की सेवा का संकल्प लें छात्र

0
327

देहरादून। श्रीमद्भगवद् गीता स्वाध्याय केंद्रम् में कर्म के महत्व की जानकारी देते हुए बताया गया कि जिस कर्म में फल की इच्छा नहीं होती, उसे निष्काम कर्मयोग कहा जाता है। व्याख्या करते हुए मानवभारती स्कूल के शिक्षक डॉ. अनंत मणि त्रिवेदी ने कहा कि व्यक्ति को कर्म पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सकारात्मक और अच्छे कार्यों का परिणाम भी अच्छा ही होता है, इसलिए कर्म करते समय फल की कामना नहीं होनी चाहिए।

मानवभारती स्कूल परिसर में प्रत्येक रविवार आयोजित गीता स्वाध्याय केंद्रम् के संयोजक डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि व्य़क्ति के कर्म में राग और द्वेष की भावना नहीं होनी चाहिए। कर्म वही श्रेष्ठ है, जो समुदायों और व्यक्तियों का हित करता हो। स्वार्थ और द्वेष की भावना से किए गए कार्यों का परिणाम नकारात्मक ही होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उनका कर्म शिक्षा हासिल करना है। शिक्षा का रचनात्मक और सकारात्मक प्रयोग करके राष्ट्र और समाज के हित के लिए कार्य करना हर व्यक्ति का कर्तत्व है।

डॉ. त्रिवेदी ने 13 मई को मातृदिवस पर विचार व्यक्त करते हुए मां की ममता के सामने दुनिया की सभी सुविधाएं फीकी हैं। सभी को अपनी माता की सेवा का संकल्प लेना चाहिए। मां भगवान का स्वरूप होती हैं।  इसलिए कोई ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे माता को दुख पहुंचता हो।  उन्होंने बच्चों को नैतिकता का पालन करने का आह्वान किया। इस अवसर मानवभारती स्कूल के निदेशक डॉ. हिमांशु शेखर ने सभी को मातृदिवस की शुभकामनाएं दीं और गीता स्वाध्याय केंद्रम् की सराहना की।

 

 

LEAVE A REPLY