मानवभारती स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब में माइक्रोसॉफ्ट की वर्कशॉप

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अटल टिंकरिंग लैब में माइक्राेसॉफ्ट एक्सपर्ट ने छात्रों से किए सवाल जवाब 
देहरादून। भारत सरकार युवाओं में क्षमता विकास की अभिनव पहल कर रही है। इसके तहत नीति आयोग के मार्गदर्शन में देशभर मे्ं एक हजार से ज्यादा स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब की स्थापना की गई है।  उत्तराखंड में मानवभारती स्कूल, देहरादून को भी इस अभिनव पहल से जोड़ा गया है। अटल टिंकरिंग लैब का मुख्य उद्देश्य बच्चों का विज्ञान, तकनीकी और इंजीनियरिंग की ओर न केवल ध्यान बढ़ाना है, बल्कि इनके सिद्धांतों के इस्तेमाल से विकास की नई संभावनाओं की खोज करना भी है। इसके साथ ही तकनीक के माध्यम से सामुदायिक व्यवस्थाओं को सरल, किफायती और मजबूत बनाना है। 
मानवभारती स्कूल की अटल टिंकरिंग लैब में बच्चों के लिए रोबोटिक्स और थ्री प्रिंटिंग के कई सेशन आयोजित किए जा चुके हैं। यह पहला मौका है, जब मानवभारती स्कूल ने माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के सहयोग से शिक्षकों के लिए 18 जनवरी को वर्कशॉप कराई। इसमें मानवभारती स्कूल की साइंस फैकल्टी और साइंस के स्टूडेंट्स के साथ देहरादून रीजन के अन्य स्कूलों के अटल टिंकरिंग लैब इंचार्ज भी शामिल हुए। वर्कशाप मूल रूप से आईओटी ( इंटरनेट ऑफ थिंग्स), माइक्रोसॉफ्ट के एजुकेशन, रोबोटिक्स और एप डेवलपमेंट टूल्स पर आधारित रही। माइक्रोसॉफ्ट से आए एक्सपट् र्स ने इन टूल्स के बेसिक्स से लेकर इनके रियल टाइम इंप्लीमेंटेशन पर विस्तार से बताया गया।  माइक्रोसॉफ्ट की ओर से ट्रेनर शैली सचदेव और कल्याण ने माइक्रोसॉफ्ट एजुकेशन टूल्स, जैसे- वन नोट, आउट लुक,  ऑफिस 365, एजुकेशन नेटवर्क की जानकारी दी और  प्रैक्टिकल सेशन भी कराए। 
दूसरे सेशन में इंटरनेट ऑफ थिंग्स और रोबोटिक्स के सिद्धांतों पर चर्चा की। माइक्रोसॉफ्ट एक्सपर्ट ने बताया कि आईओटी भविष्य की सबसे प्रभावी टेक्नोलॉजी होगी, जिससे हम उपकरणों से भी बात कर सकेंगे।  उन्होंने बताया कि आईओटी की मदद से हम कहीं दूर बैठकर भी अपने घर के सभी उपकरणों को संचालित कर सकते हैं। एक्सपर्ट ने सभी को इसका डेमो दिखाया। उन्होंने कहा कि यह टेक्नोलॉजी हेल्थकेयर में माइल स्टोन साबित होगी। इसके जरिये डॉक्टर अपने किसी भी रोगी का रियल टाइम हेल्थ स्टेट्स चेक कर सकेंगे। छोटे चेकअप के लिए रोगी को डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं होगी। एक्सपर्ट ने इस तरह के कई उदाहरण शेयर किए और लाइव डेमो कराए। 
 
    
माइक्रोसॉफ्ट एक्सपर्ट ने क्वेश्चन अॉवर में मानवभारती स्कूल के छात्रों के सवालों के जवाब दिए। आठवीं क्लास के छात्र अस्मित का सवाल था कि माइक्रो कंट्रोलर और माइक्रो प्रोसेसर में क्या अंतर है। दोनों के एप्लीकेशन क्या हैं। एक्सपर्ट ने बताया कि प्रोसेसर मल्टीटास्किंग होता है, जबकि कंट्रोलर एक विशेष कार्य के लिए ही इस्तेमाल हो सकता है। 11वीं के छात्र समर्थ ने अलग-अलग तरह के सेंसर्स और उनकी प्रोग्रामिंग के बारे में जानना चाहा। एक्सपर्ट ने कुछ एक सेंसर जैसे- आईआर, अल्ट्रासोनिक के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन सेंसर को प्रोग्रामिंग के जरिये अलग-अलग चीजों को बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। 
 मानवभारती स्कूल के निदेशक डॉ. हिमांशु शेखर ने वर्कशाप में शामिल ट्रेनर, शिक्षकों और छात्रों से बात की। उन्होंने छात्रों से पूछा कि इस वर्कशाप से उनको क्या फायदा हुआ है और एटीएल लैब से उनकी क्या अपेक्षाएं हैं। मानवभारती स्कूल की प्रिंसिपल नीना पंत ने माइक्रोसॉफ्ट एक्सपर्ट और शिक्षकों व छात्रों से वर्कशॉप के अनुभव साझा किए। इस वर्कशाप में मानवभारती स्कूल के एटीएल इंचार्ज डॉ. गौरवमणि खनाल, शिक्षक मनोज कुमार , डॉ. फराह समीर, पूनम ढौंडियाल, जाग्रति लखेड़ा, केंद्रीय विद्यालय एफआरआई से एटीएल इंचार्ज अमित कुमार , केंद्रीय विद्यालय ओएनजीसी से एटीएल इंचार्ज मोहम्मद इलाही शामिल हुए। 

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