मजे मजे में छुट्टियां बिताओ और कुछ नया सीखकर आओ   

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मेरे प्यारे बच्चों

छुट्टियां शुरू हो गई हैं और बहुत सारे बच्चों ने अपने पैरेंट्स के साथ कहीं घूमने का प्रोग्राम बनाया होगा। कोई पहाड़ की सैर पर जाएगा तो कोई रिश्तेदारों के पास और किसी ने अपने गांव जाने का मन बनाया है। छुट्टियां वो वक्त होती हैं, जब आप बाहर की दुनिया से कनेक्ट होकर कुछ ऐसा जानने और सीखने का मौका पाते हैं, जो आपकी पढ़ाई व करिअर में मदद करेगा। यह ठीक उसी तरह है जब आप अपने टीचर के साथ किसी विरासत, संग्रहालय या फिर महत्वपूर्ण स्थान को देखने के लिए एजुकेशनल टूर पर जाते हैं। यहां आप पर क्लासरूम जैसी बाध्यताएं नहीं होतीं और यहां मौजूद तथ्य आपके मनोमस्तिष्क पर चस्पा हो जाते हैं। यह शायद इसलिए भी होता है कि क्योंकि यहां भ्रमण में आप रूचि लेते हैं और सहजभाव से तथ्यों को जानने का प्रयास करते हैं। आप छुट्टियों में कहीं जाने को एजुकेशनल टूर के नजरिये से देखेंगे तो यह तय मानिये कि आपकी जानकारियों में सकारात्मक रूप से वृद्धि होगी और आप एक नया टैलेंट लेकर स्कूल की ओर वापसी करेंगे। कुछ जानकारियों को आपके साथ शेयर करना जरूरी है, शायद ये बातें आपको गाइड कर सकें।

आप जहां भी जाएं, वहां के बारे में जैसा देखा,वैसा लिखा की शैली में डायरी बना लीजिए। यह डायरी एक ही दिन में बैठकर न लिखी जाए। रोजाना शाम को कम से कम आधा घंटे का समय निकालकर पूरे दिन का किस्सा उस शैली में लिखिए, जिसमें आप बात करते हैं। डायरी लिखने के दौरान हो सकता है कि आप उस स्थान विशेष के बारे में कुछ नये सवाल खुद से कर बैठें। अगर तथ्यों को लेकर कोई सवाल उठते हैं तो आप उनके जवाब जान सकते हैं। डायरी लिखने से आपकी लेखन शैली पहले से और बेहतर हो जाएगी। छुट्टियों के दौरान अपनी रुचि के अनुसार किया गया यह क्रियाकलाप आपको क्रियेटिव राइटिंग की ओर ले जाएगा । यह आपकी कल्पना शीलता को बढाएगा और इसको आप शब्दों में पिरो सकेंगे। लेखन के लिए भारी भरकम या कठिन शब्दों की जरूरत नहीं होती। मेरा मानना है कि लेखन वही है जो सरल तरीके से संवाद कराता हो। उम्मीद है कि आप अपनी डायरी बनाकर अपनी छुट्टियों को हर समय ताजातरीन रखेंगे।

एक और खास सलाह यह है कि आप छुट्टियों में नई चीजों को जानें और सीखें, लेकिन अपने कोर्स को जेहन में जरूर रखें और अपनी किताबों से निरंतर जुड़े रहें। अपने पाठ्यक्रम को जानने की यह सतत प्रक्रिया आपको बेहतर बनाएगी। कोई भी व्यक्ति कुछ समय में या एक दिन में या एक महीने में किसी नये विषय को पूरी तरह आत्मसात नहीं कर पाता। मेरे अनुसार विषयों को समझने के लिए निरंतरता होनी जरूरी है। विषय को लेकर आपके सवालों की सूची लंबी होनी चाहिए, ताकि आप ज्यादा से ज्यादा जवाब जान सको, जो आपकी पाठ्यक्रम पर पकड़ को मजबूत बनाता है और फिर कहीं से भी कुछ पूछ लिया जाए तो आपके पास जवाब होगा। आपको छुट्टियों के लिए तय किए गए व्यस्त शैड्यूल में अपनी किताबों के लिए समय निकालना होगा। मेरी आपसे आशा है कि आप स्कूल लौटकर अपने टीचर से पूछने के लिए विषयों से जुड़े सवालों की लिस्ट लेकर आएंगे।

देश दुनिया की सैर के साथ छुट्टियां आपकी क्रियेटिविटी को बढ़ाने, रूचि के विषय को और बेहतर बनाने का शानदार मौका देती हैं, लेकिन यह आपको तय करना है कि आपको ऐसा क्या नया सीखना या जानना है जो आपकी स्कूली पढ़ाई को बेहतर बनाने में मदद करे और हर आयाम पर व्यक्तित्व विकास का हिस्सा भी बने।

तकनीकी तरक्की के दौर में आपके पास बहुत सारे विकल्प होंगे, पर मेरी सलाह है कि आप ऐसा कुछ नया जानों या अभ्यास करो, जो आपकी रूचि के विषय के बहुत नजदीक हो या आपके प्लान किए गए करियर तक पहुंचने की पहली सीढ़ी हो। आप जो भी कुछ सीखना या नया कुछ करना चाहते हैं, उसमें आपकी रुचि और उपलब्ध संसाधनों का बहुत बड़ा योगदान है।

अगर आपको मैथ काफी पसंद है और आप क्लास में मैथ के सवालों को लेकर सबसे आगे रहते हैं तो छुट्टियों में आप इस सब्जेक्ट को और बेहतर बनाने के लिए कुछ नया कर सकते हैं। यह तो आप जानते ही हैं कि मैथ लॉजिकल सब्जेक्ट है। छुट्टियों में आप सुडोकु, मैथ क्विज, अंक पहेली, वर्ग पहेली, रीजनिंग, बेसिक मैथ की बुक्स सॉल्व करें। चैस (शतरंज) खेलें और ग्रामर का अभ्यास करें। डिबेट में हिस्सा लें। कोई एक फारेन लैंग्वेज सीखें। साइंस म्युजियम घूमने जाएं। कैलकुलेटर का इस्तेमाल किए बिना मैथ की प्राब्लम सॉल्व करने का प्रयास करें। एबेकस या कंप्यूटर की बेसिक प्रोग्रामिेंग की क्लास ज्वाइन कर सकते हैं। अपने से छोटे बच्चों को साइंस और मैथ समझने में मदद कर सकते हैं। प्रकृति के बारे में ज्यादा से ज्यादा बातें जानने के लिए किताबें पढ़ सकते हैं। मैथ और साइंस में क्यों और कैसे का जवाब पाने की प्रवृत्ति होनी चाहिए। सवालों का सॉल्व करने के लिए अपनी पास घड़ी जरूर रखिए, ताकि समय के भीतर ज्यादा प्रश्नों के सही जवाब देने की तैयारी हो सके। यदि आप किसी कंपीटिशन की तैयारी कर रहे हैं तो यह प्रैक्टिस आपको मदद करेगी।

हम जिस पर्यावरण में रहते हैं, उसको स्वच्छ बनाए रखना भी हमारी जिम्मेदारी है। अपने आसपास स्वच्छता को बनाए रखें। ऐसे किसी भी कार्य को महत्व न दें, जो प्रदूषण फैलाता हो। पॉलीथिन को न कहने की आदत डालें। पौधे लगाएं और उनकी देखरेख भी करें। सड़क पर कूड़ा करकट न फेंके। अन्य लोगों को भी सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी न फैलाने के लिए जागरूक करें। जल और बिजली बचाने की पहल खुद से करें। अपने से बड़ों और बुजुर्गों का सम्मान करें। परिवार के बुजुर्गों के साथ कुछ समय जरूर बिताएं। अपने स्वास्थ्य और खानपान पर ध्यान दें।

और भी बहुत सी बातें हैं, जो आपके साथ शेयर करना जरूरी है। आपका और हमारा यह संवाद लगातार जारी रहेगा। ….. शुक्रिया फिर मिलेंगे। आपकी छुट्टियां और यात्रा मंगलमय हो।

  • नीना पंत, प्रिंसिपल, मानवभारती इंटरनेशल स्कूल, देहरादून

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