मानव भारती…

0
796
डॉ. अनंतमणि त्रिवेदी

मानवता के ज्ञान का प्रकाश मानव भारती,                
हर बच्चे के ज्ञान का स्थान मानव भारती।
सर्वधर्म- समभाव का प्रतीक मानव भारती,
‘‘आत्मानं विद्धि’’ का उद्घोष मानव भारती।।

आधुनिक शिक्षा का स्कूल मानव भारती,
साथ में प्राचीनता का ज्ञान मानव भारती।
उपनिषद् – वचनों का यह सार मानव भारती,
रामानुजन के ज्ञान का अभ्यास मानव भारती।। 

दुर्गा प्रसाद के कर्म का सदन मानव भारती,
शिक्षाविदों की साधना का केन्द्र मानव भारती।
प्रतिभा और विकास का सम्मान मानव भारती,
प्रकाश और सुगन्ध का आदित्य मानव भारती।।

प्रेम और उत्साह का जीवन्त मानव भारती
हर बच्चों के खुशियों का उत्साह मानव भारती।
सदकर्म श्रद्धा ज्ञान का हर सृजन मानव भारती,
सभ्यता और संस्कृति का प्रयोग मानव भारती।।

मानव भारती स्कूल के छात्र-छात्राओं ने गीता प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार हासिल किया।

कभी धूप कभी छांव हो जाती मानव भारती,
कभी बसन्त बन होंठो पे मुस्काती मानव भारती।
क्रीडा कला कौशल सदा करती हे मानव भारती,
कर्मयोगी धैर्य- ज्ञानी करती है मानव भारती।।

छात्र- छात्राओं का सही समाधान मानव भारती,
उनमें निखार लाती सदा वसुधा की मानव भारती।
अनुशासन को नियंत्रित करती है मानव भारती, संगणक शिक्षा का आगाज मानव भारती।।

संगीत के सप्तस्वरों का गान मानव भारती,
नृत्य में घुंघरूओं की है शान मानव भारती।
खेल में प्रतिभाओं का है नाम मानव भारती,
हे विविधता ढेर सारी नाम मानव भारती।।

समाज के नव – सृजन का है ज्ञान मानव भारती,
सूर्य की सद् रश्मियों का अनुसंधान मानव भारती।
कामधेनु की तरह प्यारी है मानव भारती,
नवनीत ज्ञानरूप देती सबको मानव भारती।।

सुयोग्य शिक्षक हैं जहां हे सही सम्वेदना,
व्यक्ति- निर्माण की गंगा है मानव भारती।
धैर्य संयम शान्ति की कान्ति है मानव भारती,
कलान्त- आनन- कान्ति का मार्ग मानव भारती।।

आंग्लमय- परिवेष में है हम सभी पढते सदा,
पाक शास्त्र के साथ ही वाणिज्य की अदभुत कला।
मनोविज्ञान- विज्ञान का सुज्ञान मानव भारती
हे सिखाती हम सभी को ज्ञान मानव भारती।।

पुस्तकालय हे जहाँ प्रबुद्ध लोगों के लिए,
सबको उजियारा हे देती पुस्तकों से भारती।
विद्या कला कौशल्य हेतु हे यह मानव भारती,
जीवन सरल और मन विमल करती है मानव भारती।

ईशानो विश्वविद्यानां विश्वनाथः सुबुद्धिदः।
मन्दिरेऽस्मिन् सरस्वत्याः प्रसीदेत् शाश्वती समाः।।

 

LEAVE A REPLY