आप भी छू सकते हैं सफलता का आसमां

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आप भी सफलता का आसमां छू सकते हो। इसके लिए खुद की क्षमताओं को जानने की आवश्यकता है। अपनी सोच में थोड़ा सा बदलाव लाकर देखिए, आपको हर वो काम आसान लगेगा, जिसे सोचकर आज तक कहते थे कि यह मुझसे नहीं हो पाएगा। जीवन में सफलता पाने वाले किसी और दुनिया से हमारे बीच नहीं आते, वो भी हमारी ही तरह हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि वो अपनी क्षमताओं को पहचान कर आगे बढ़ रहे हैं।

सीबीएसई रिसोर्स पर्सन श्वेता शर्मा सोमवार सुबह मानवभारती स्कूल देहरादून में क्लास 11 के छात्र-छात्राओं से लाइफ स्किल पर चर्चा कर रही थीं। व्यक्तित्व विकास, टीम वर्क, स्ट्रेंथ, आत्म अनुशासन, समय प्रबंधन क्या हैं और इनका जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है, पर विस्तार से चर्चा ही नहीं की, बल्कि कुछ एक्टीविटी के माध्यम से समझाया भी।

एक एक्टीविटी के दौरान छात्र-छात्राओं की अलग-अलग टीमें बनाई गईं। सभी टीमों को कुछ टास्क दिए गए। ये टास्क टीमवर्क को जानने के लिए दिए गए। जिसके माध्यम से उनकी बौद्धिकता, रचनात्मकता, अनुशासन, समय प्रबंधन को भी समझा गया। छात्र-छात्राओं ने जहां क्राफ्ट वर्क के जरिये क्रियेटिविटी को प्रस्तुत किया, वहीं अपनी टीम की क्षमताओं, गुणों और व्यवहार को भी समझा।

क्षमताओं पर चर्चा में श्वेता शर्मा ने बच्चों को छोटी सी रस्सी से बंधे विशालकाय हाथी की कहानी सुनाई। बताया कि जन्म के बाद से ही हाथी के पैर में एक रस्सी बांध दी जाती है। हाथी के मन और मस्तिष्क में यह बात अच्छी तरह बैठा दी जाती है कि वह इस खूंटे से आजाद नहीं हो सकता। उसे इस रस्सी को तोड़कर जाने का जोखिम नहीं उठाना चाहिए। अगर हाथी चाहे तो रस्सी को एक झटके में तोड़ सकता है, लेकिन वो तो अपनी दुनिया में मस्त होकर उस पैर को आगे पीछे तो करता है, लेकिन रस्सी को झटका नहीं देता।

इसका मतलब तो यही हुआ कि हाथी इस बंधन से मुक्त नहीं होना चाहता। इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि असीमित क्षमता वाला हाथी इस सोच से कभी बाहर नहीं निकल पाता है कि वह इस रस्सी को तोड़ नहीं पाएगा। यही कारण होता है कि वो कभी प्रयास भी नहीं करता और अपनी जिंदगी को खूंटे पर बंधा रहकर ही गुजार देता है।

समय प्रबंधन पर उन्होंने छात्र-छात्राओं से पूछा कि यदि आपको 86400 रुपये देकर यह कहा जाए कि आपको यह एक दिन यानी 24 घंटे में खर्च करने हैं, तो आप क्या करोगे। सभी ने अपनी अपनी पसंद का सामान खरीदने की बात कही। कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि इसमें से कुछ रकम चैरिटी में दे देंगे। कुल मिलाकर सभी ने पूरी रकम को एक ही दिन में खर्च करने का अपना-अपना प्लान कुछ ही देर में बता दिया।

रिसोर्स पर्सन ने उनको बताया कि इसी तरह आपके पास एक दिन में 86400 सेकेंड होते हैं, क्या आप इन सेकेंडों यानी समय का प्रबंधन भी उसी तेजी से कर सकते हो, जैसा कि मनी मैनेजमेंट किया है। अगर आपने पैसा खर्च नहीं किया तो वो आपके पास अगले दिन के लिए भी होगा, लेकिन आज मिला समय, कल बचत के रूप में नहीं रहेगा। पैसे के आने जाने का क्रम बना रहता है, लेकिन टाइम रिसाइकिल नहीं होता। इसलिए समय का प्रबंधन करना सीखना होगा। यदि आपने एक दिन में 86400 सेकेंड का सही प्रबंधन नहीं किया तो ये फिर आपको मिलने वाले नहीं हैं। कुल मिलाकर कहना है कि समय को बचाकर नहीं रख सकते। इसका सदुपयोग नहीं किया तो यह बेकार हो जाता है।

वर्कशाप में चांदनी चौक टू चाइना फिल्म के उस डायलॉग “मुझे उन दस हजार मूव से खतरा नहीं है, जो तुमने एक बार प्रैक्टिस किया है…, मुझे उस एक मूव से खतरा है, जो तुमने दस हजार बार प्रैक्टिस किया है “ के माध्यम से समझाना चाहा कि अभ्यास कितना जरूरी है। आप उस स्तर तक अभ्यास करो कि गलतियां होना बंद हो जाए। हमेशा सकारात्मक पक्ष पर सोचिए। यह मत सोचिए कि यह मुझसे नहीं हो सकता। यदि आप अपनी क्षमताओं को पहचान कर धैर्य और लगन के साथ अभ्यास करेंगे तो एक दिन यहीं कहेंगे कि मैं कर सकता हूं। सबसे पहले हमें नकारात्मकता से बाहर निकलना होगा। वर्कशाप में 86 छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

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