कैनी सर को लकड़ी के हर टुकड़े में दिखती है दुनिया

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प्रकृति की सभी सौगात में मुझे जिंदगी दिखती है। इसको समझने के लिए जिस नजरिये की जरूरत है वो भी आपको नेचर के बहुत करीब आकर ही मिलेगा। मेरा मानना है कि नेचर आपको सब सिखाती है। मुझे तो लकड़ी के टुकड़ों में भी एक दुनिया नजर आती है और फिर मैं उसको संवारने मे ंजुट जाता हूं। यह कहना है मानव भारती स्कूल परिसर में वुड आर्ट स्टूडियो चला रहे कैनेथ पफेट का।

बच्चों में कैनी सर के नाम से जाने जाने वाली कैनेथ के पास स्कूल के छात्र-छात्राएं वुड आर्ट सीखते हैं। एक से बढ़कर एक डिजाइन, यहां तक कि कोई भी चेहरा हू ब हू लकड़ी के पीस पर ढाल देते हैं कैनी सर। एेसा लगता है कि मानो अभी बोल उठेगा। कैनेथ छात्रों को रोजाना कुछ नया सिखाने का प्रयास करते हैं। उनका कहना है कि किसी भी डिजाइन को तैयार करने में मेहनत और लगन तो चाहिए ही, लेकिन इससे भी कहीं ज्यादा जरूरी है आप उस टुकड़े में क्या देखते हैं,यानि आपका इमेजिनेशन।

बताते हैं कि उन्होंने कहीं से वुड आर्ट की ट्रेनिंग नहीं ली। मेरे पिता जैक पफेट कारपेंटर थे और उनकी वर्कशॉप में लकड़ी के छोटे-बड़े गुटकों की कोई कमी नहीं थी। मैं पिता के कुछ औजारों के साथ इन टुकड़ों पर नये-नये प्रयोग करता रहता था। जब कुछ नया करता तो लकड़ी के इन बेजान समझे जाने वाले टुकड़ों में कुछ नई आकृति उभरकर सामने आ जाती। इनको देखकर मैं बहुत खुश होता था और धीरे-धीरे मेरी रुचि इनमें बढ़ने लगी। फिर क्या था मैं इस आर्ट में खोने लगा। पढ़ाई के साथ वुड आर्ट में रोजाना कुछ नया करने की कोशिश आज भी जारी है। कैनेथ बताते हैं कि मुझे लकड़ी के टुकड़ों में दिख जाता है कि किसको क्या आकार देना है। इनके साथ वर्षों से बने लगाव औऱ संवाद ने मुझमें इनको समझने का परिपक्व नजरिया विकसित कर दिया है। यह एक दिन या कुछ महीनों का नहीं बल्कि वर्षों से चल रहे सतत प्रयास और अभ्यास का नतीजा है। मैं हमेशा अपने छात्रों से भी यही कहता हूं कि चाहे वुड आर्ट हो या आपके कोर्स का कोई भी सब्जेक्ट, उसका सतत अभ्यास ही आपको सर्वश्रेष्ठ बनाएगा।

देहरादून के परे़ड ग्राउंड से लेकर नई दिल्ली के प्रगति मैदान में कैनी सर अपनी आर्ट काे प्रदर्शित कर चुके हैं। मानव भारती स्कूल ने कैनेथ पफेट की इस आर्ट को पहचाना ही नहीं बल्कि उनके लिए एक स्टूडियाे तैयार कराया, ताकि छात्र-छात्राओं को कुछ नया देखने और सीखने का अवसर हासिल हो सके। कैनेथ बच्चों को आसान तरीके से वुड आर्ट की बारीकियों के बारे में बताते हैं। छात्र-छात्राएं वुड पर करने वाले प्रयोगों को लेकर अपने इमेजिनेशन उनके साथ शेयर करते हैं और उनकी मदद से वुड को कुछ नया आकार देने में जुट जाते हैं। देहरादून में वन विभाग के डियर पार्क जू के मैन गेट पर सबसे पहले कैनी सर की आर्ट ही नजर आती है।

आपदा प्रभावितों को भी दी ट्रेनिंग: मानवभारती स्कूल के प्रयासों से रुद्रप्रयाग से देहरादून आए कुछ आपदा प्रभावित युवाओं ने कैनेथ पफेट से वुड आर्ट की ट्रेनिंग ली। इसका मकसद आजीविका के लिए कौशल विकास के जरिये स्वराेजगार स्थापित करना है। कैनेथ सर ने उनको लकड़ी के टुकड़ों से घरेलू इस्तेमाल की वस्तुएं, ज्वेलरी और खिलौने बनाने सिखाये। ट्रेनिंग के बाद उनको वुड आर्ट के लिए जरूरी टूल्स भी उपलब्ध कराए गए।

नई दिल्ली के जिमखाना क्लब में लगाएंगे प्रदर्शनी: मानवभारती स्कूल के सहयोग से कैनेथ पफेट नई दिल्ली के जिमखाना क्लब में अपनी आर्ट की प्रदर्शनी लगाएंगे। वहां अपनी आर्ट के कुछ नमूनों को पेश करेंगे, ताकि वुड आर्ट के बारे में लोग जान सकें और इसको कौशल विकास के साथ स्वरोजगार के लिए युवाओं को प्रेरित किया जा सके।

शहर में नहीं बल्कि गांव में रहना पसंद : कैनेथ पफेट चंपावत जिले के रहने वाले हैं और उनकी शुरुआती पढ़ाई मसूरी के वायनबर्ग एलेन स्कूल मसूरी से की। देहरादून के मानवभारती स्कूल में वुड आर्ट स्डूडियाे में काम कर रहे कैनी सर इन दिनों अपने गांव गए हैं। उनको शहर में रहना अच्छा नहीं लगता। कहते हैं गांव में शांत माहौल है और गांव ही नेचर के सबसे ज्यादा करीब हैं। नेचर से कुछ सीखना है तो मेरे लिए उत्तराखंड के पर्वतीय गांवों से अच्छी कोई जगह नहीं है। शहरों से तो प्रकृति का नाता केवल बची खुची हरियाली तक ही रह गया।

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