गीता स्वाध्याय केंद्रम् में व्यक्तित्व निर्माण पर चर्चा

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मानवभारती लाइव


आहार विहार ठीक रखने से कर्म मार्ग में बाधाएं नहीं आती। मानवभारती स्कूल परिसर में रविवार को गीता स्वाध्याय केंद्रम् में आहार विहार के साथ व्यक्तित्व निर्माण पर चर्चा की गई। श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का वर्णन करते हुए डॉ. अनंतमणि त्रिवेदी ने कहा कि जो व्यक्ति अपना आहार विहार ठीक रखता है, सभी कार्यों को अनुशासन और नियमों के दायरे में करता है। सही समय पर सोता और जागता है, नियमित रूप से कर्म करता है। उसके कर्ममार्ग में कभी भी बाधाएं नहीं आतीं और वह निरापद कर्मयोगी होता है।

डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि आज के परिवेश में हमारा अन्न दूषित होता जा रहा है। इसलिए मन भी साफ नहीं है। मन की स्वच्छता के लिए अन्न का शुद्ध होना अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि शुद्ध अन्न से स्वस्थ मन का निर्माण होता है और तभी व्यक्ति एक सात्विक कर्मयोगी बनकर स्वयं का, समाज का तथा राष्ट्र विकास में अहम भूमिका निभा सकता है। इस अवसर मानवभारती स्कूल के छात्र-छात्राओं ने श्रीमद्भगवद् गीता के श्लोकों का पाठ किया।

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