अधिकार चाहिए तो कर्तव्यों का पालन जरूरी

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देहरादून। मानवभारती लाइव

गीता में कर्म को प्रधानता दी गई है और इसी के अनुसार व्यक्तियों को श्रेणीबद्ध किया गया है। इसके तहत तीन प्रकार के व्यक्ति बताए गए हैं, पहले वो व्यक्ति जो किसी भी कार्य की शुरुआत ही नहीं करते। ये व्यक्ति जीवन में सफल नहीं हो पाते और फिर ईश्वर व दूसरो को कोसते रहते हैं।

श्रीमद्भगवद् गीता के श्लोकों का सार बताते हुए डॉ. अनंतमणि त्रिवेदी ने कहा कि संसार में दूसरी श्रेणी उन व्यक्तियों की है, जो कार्य की शुरुआत तो करते हैं, लेकिन अगर कोई बाधा आ गई तो वहीं रुक जाते हैं और सफलता हासिल नहीं कर पाते। ये व्यक्ति असफलताओं से घबराते हैं और फिर किसी कार्य को शुरू करने का प्रयास नहीं करते।

  

तीसरी श्रेणी उत्तम पुरुषों की है, ये वो पुरुष हैं जो बार-बार बाधाएं आने के बाद भी अपने सत्कर्मों का मार्ग नहीं छोड़ते और अंततः सफलता को प्राप्त करते हैं।

उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए, तभी उसको अधिकारों की प्राप्ति होती है। छात्र का कर्तव्य शिक्षा हासिल करना है और पिता का कर्तव्य उनके पालन-पोषण की जिम्मेदारी संभालना है। अगर आप अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हो तो आपको अधिकार भी प्राप्त होंगे। कर्तव्य का आशय कर्म से हैं, इसलिए उत्तम श्रेणी के व्यक्ति का दर्जा हासिल करने के लिए सत्कर्म करते रहना चाहिए। बाधाएं आती हैं, लेकिन अच्छे कार्यों के सामने बाधाओं का अस्तित्व भी खत्म हो जाता है।

 

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