गीता स्वाध्याय केंद्रम्ः अधिकारों को पाने के लिए कर्तव्यों का निर्वहन जरूरी

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देहरादून। गीता स्वाध्याय केंद्रम् में श्रीमद्भगवद् गीता के दूसरे अध्याय में वर्णित सांख्य योग पर चर्चा की गई। इसमें अच्छे व्यक्ति के गुणों और कार्यों पर फोकस किया गया। बताया गया कि हर व्यक्ति को अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों पर भी ध्यान देना चाहिए।

मानवभारती स्कूल परिसर में डॉ. अनंतमणि त्रिवेदी ने छह भारतीय दर्शनों सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, पूर्वमीमांसा, उत्तर मीमांसा की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सृष्टि की पूरी प्रक्रिया कुल 25 तत्वों से संचालित होती है।उन्होंने कहा कि वर्तमान में श्रीकृष्ण का वचन और श्रीराम का चरित्र अनुसरण करने योग्य है। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि गीता हमें पात्र बनना सिखाती है, जिससे जीवन में सुपात्रता आती है। यह पूरी तरह से अपने कर्तव्य पर निर्भर करता है। अधिकारों को पाने के लिए कर्तव्यों को भी पूरा करना होता है। यह बात बच्चों से लेकर बुजुर्गों, सभी पर लागू होती है।

छात्र-छात्राओं को जीवन में सफलता हासिल करने के लिए अपने कर्तव्य पर निष्ठा के साथ ध्यान देना होगा। उनका कर्तव्य है कि वो अपनी पढ़ाई पर ध्यान लगाएं। जीवन में नैतिकता को अपनाएं और बुजुर्गों का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि यदि आप चाहते हो कि कोई आपके साथ बुरा व्यवहार न करे, तो आप पहले स्वयं ही दूसरों के साथ बुरा व्यवहार करने से बचें।

 

 

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