नियमानुसार कार्यों से दूर होती है अज्ञानताः श्रीमद्भगवद्गीता

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देहरादून। श्रीमद्भगवद्गीता में निष्काम कर्म योग की विवेचना करते हुए मानवभारती स्कूल के संस्कृत शिक्षक डॉ. अनंतमणि त्रिेवेदी ने कहा कि जिस कर्मयोग में फल की कामना नहीं होती, वह निष्काम या अनासक्ति कर्म योग कहलाता है। निष्काम, नित्य तथा शास्त्रविहित अर्थात नियमानुसार होने वाले कर्म से अज्ञानता दूर होती है।

मानवभारती स्कूल परिसर में हर रविवार सुबह दस से 11 बजे तक संचालित होने वाले श्रीमद्भगवद्गीता स्वाध्याय केंद्र में डॉ. त्रिवेदी ने निष्काम कर्म योग की विवेचना की। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपना कर्म करना चाहिए। ज्ञान प्राप्त करना, अपने माता-पिता, गुरुजनों और बड़ों का सम्मान करना, छोटों को स्नेह करना, अनुशासन में रहना, नियमों और नैतिकता का पालन करना, स्वच्छता का ध्यान रखना, पर्यावरण का संरक्षण करना, कोई ऐसा कार्य नहीं करना जिससे किसी को हानि या दुख हो, सभी से अच्छा व्यवहार करना आदि हर व्यक्ति का कर्म है।

डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि फल की इच्छा किए बिना नियमानुसार, नित्य रूप से किए जाने वाले कार्य से अंतःकरण स्थिर हो जाता है। इस प्रक्रिया में व्यक्ति कर्म के बंधनों से मुक्त होकर सुख और आनंद से जीवन व्यतीत करता है। इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक डॉ. हिमांशु शेखर, विद्यालय के छात्र-छात्राएं भी उपस्थित रहे। मानवभारती स्कूल में बच्चों को नैतिकता और कर्तव्यबोध की शिक्षा देने के लिए गीता स्वाध्याय केंद्र का संचालन किया जा रहा है।  केंद्र में छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को भी आमंत्रित किया गया है।

 

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