गीता स्वाध्याय केंद्रम्ः सुख और दुख ईश्वर ने नहीं बनाए

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  • मानवभारती स्कूल परिसर में गीता स्वाध्याय केंद्रम् का तीसरा रविवार
  • धर्म का अर्थ अपने कर्तव्य पथ को अपनाना है

मानवभारती लाइव


सुख और दुख ईश्वर ने नहीं बनाए। यह तो इंसान ने खुद अनुभव किए। इसको इस तरह समझिए, किसान चावल का उत्पादन करता है और आप चावल से तरह-तरह के पकवान तैयार करते हैं। चावल में हल्दी, नमक और अन्य पदार्थ मिलाकर आपने पुलाव बना दिया और उसी चावल में दूध, चीनी और मेवे मिलाकर खीर बना दी। चावल तो वही है, जिसको आपने अपने लिए अलग-अलग रूप दे दिया। इसी तरह सुख और दुख हैं।

अच्छे कार्य किए तो सुख मिला और बुरे कार्य किए तो दुख। सुख और दुख मात्र अनुभूति हैं और यह इंसान ने बनाए हैं। सुख और दुख ईश्वर की देन नहीं हैं। यह सद्विचार मानवभारती स्कूल परिसर में रविवार 23 जुलाई को गीता स्वाध्याय केंद्रम् में श्रीमद्भागवद् गीता के अध्यायों पर चर्चा करते हुए डॉ. अनंतमणि त्रिवेदी ने कहे।

डॉ. त्रिवेदी ने पहले अध्याय विषाद योग पर चर्चा करते हुए कहा कि युद्ध के मैदान में अर्जुन को विषाद हो गया और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि मैं उन लोगों से युद्ध कैसे कर सकता हूं, जो मेरे भाई हैं, मेरे गुरुजन हैं और मेरे परिवार के हैं। मैं इनको युद्ध के मैदान में मारने की कैसे सोच सकता हूं, वह भी एक राज्य को पाने की इच्छा से। इस पर श्रीकृष्ण ने कहा कि अर्जुन जन्म देने वाला भी मैं हूं और किसी को मारने वाला भी मैं हूं। तुम तो निमित्त मात्र हो। आत्मा अजर और अमर है। दुर्योधन और कौरव सब अधर्म के रास्ते पर चल रहे हैं । इसलिए अर्जुन तुम इनसे युद्ध करो और विजय हासिल करो। तुम योद्धा के धर्म का पालन करो।

डॉ. त्रिवेदी बताते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के माध्यम से पूरे संसार को गीता का संदेश दिया। उन्होंने व्यक्ति से अधर्म का रास्ता छोड़कर धर्म को अपनाने का संदेश दिया। यहां धर्म का अर्थ अपने कर्तव्य पथ को अपनाना है। यह कर्तव्य अपने परिवार, समाज और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना है।

हर व्यक्ति जानता है कि उसका अपने, परिवार, समाज और देश के प्रति क्या कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि समाज में नैतिकता की कमी आ रही है, इसलिए नैतिकता बनाए रखना भी हम सभी का धर्म है, हम सभी का कर्तव्य है। अगले रविवार सुबह 10 से 11 बजे तक गीता स्वाध्याय केंद्रम्, मानवभारती स्कूल में फिर मिलते हैं श्रीमद्भागवद् गीता के नये जीवन मूल्यों और प्रेरक विचारों के साथ।

 

 

 

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