क्रोध को त्यागकर शांति का मार्ग अपनाएं

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देहरादून। मानवभारती स्कूल में रविवार को गीता स्वाध्याय केंद्र में क्रोध पर चर्चा की गई। क्रोध का कारणः निवारण और परिणाम विषय पर व्याख्यान दिया गया। मानवभारती स्कूल के शिक्षक डॉ. अनंतमणि त्रिवेदी ने कहा कि क्रोध विनाश का कारण होता है। क्रोध से अत्यंत मूढ़भाव उत्पन्न होता है। मूढ़भाव से स्मृति में भ्रम हो जाता है। स्मृति में भ्रम से बुद्धि अर्थात ज्ञान शक्ति को हानि पहुंचती है। ऐसे में व्यक्ति अपनी वर्तमान स्थिति से गिर जाता है। जीवन में सर्वदा शांति का मार्ग अपनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है कि वह जीवन में शिष्टाचार, संयम और शांति का मार्ग अपनाए। इससे स्वयं और समाज के बीच सामंजस्य मजबूत होता है। डॉ. त्रिवेदी ने नीति शतक का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐश्वर्य की शोभा सज्जनता से है। शौर्य की शोभा वाणी के संयम से है। ज्ञान का भूषण शांति है। कुल का भूषण विनय है।

उन्होंने जीवन में नैतिकता का बनाए रखने को कहा। साथ ही स्वाध्याय करके मानवीय गुणों के संरक्षण पर जोर दिया। इस अवसर अधिक संख्या में छात्र-छात्राएं भी उपस्थित हुए। मानवभारती स्कूल परिसर में हर रविवार सुबह दस से 11 बजे तक गीता स्वाध्याय केंद्र निशुल्क चलाया जा रहा है।

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