मानवभारती में रंग हिमालय

0
151
मानव स्कूल में आयोजित रंग हिमालय कार्यक्रम में मानवभारती स्कूल के निदेशक डॉ. हिमांशु शेखर, उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के निदेशक नरेंद्र सिंह, प्रमुख उद्यमी एस फारुख, प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता भूपेंद्र सिंह, शिक्षाविद् किरन उल्फत और अन्य अतिथि।

देहरादून। जिंदगी का सौंदर्य विविधता से है। विविधता के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। चाहे वो रंगों की हो, भाषा की हो, धर्म की हो या फिर खानपान, व्यवहार या स्वरूप की ही क्यों न हो। विविधता को जानने, इसकी विरासत को सहेजने के लिए फेस्टीवल ऑफ डायवर्सिटी रंग हिमालय को मानवभारती स्कूल के साथ मनाया गया।

मानवभारती स्कूल में रंग हिमालय में सर्वधर्म प्रार्थना करते बच्चे और युवा
रंग हिमालय में उत्साह के साथ शामिल हुए मानवभारती स्कूल के बच्चे।
रंग हिमालय में उपस्थित मानवभारती स्कूल के बच्चे

सोमवार को मानवभारती स्कूल परिसर में नन्हीं दुनिया रंगशाला और अविकल स्टूडियो की ओर से प्रख्यात रंगकर्मी आलोक उल्फत के निर्देशन में उत्सव का आगाज फ्लावर सेरेमनी से हुआ। रंगों ही नहीं बल्कि वनस्पतियों के महत्व को भी व्यक्त करती इस पेशकश के जरिये विविधता की खूबसूरती को दिखाया गया। रंग हिमालय की सह संस्थापक सात्विका गोयल ने बताया कि विविधता के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। हम बच्चों से लेकर बड़ों तक यह बात पहुंचाना चाहते हैं कि विविधता क्यों जरूरी है और इसको संजोए रखने के लिए क्या किया जाना चाहिए। इसके लिए रंग हिमालय यानि विविधता के पर्व का आयोजन किया जा रहा है। 

रंग हिमालय कार्यक्रम में हिमालय की प्रतिकृति को फूलों, फलों और वनस्पतियों से सजाते मानवभारती स्कूल के बच्चे।संगीत विशेषज्ञ एना तनवीर की म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट हार्पसीकोर्ड पर शानदार धुनों के बीच हिमालय की प्रतिकृति को बच्चों और अतिथियों ने तरह तरह के फलों, फूलों और वनस्पतियों से सजाया।

रंग हिमालय कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षाविद् नीना त्यागी, मानवभारती स्कूल के निदेशक डॉ. हिमांशु शेखर तथा उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के निदेशक नरेंद्र सिंह और अन्य अतिथि।
रंग हिमालय कार्यक्रम में शंखों की ध्वनि के माध्यम से विविधता को समझाते शिक्षक कपिल।

इसके बाद मानवभारती स्कूल के निदेशक डॉ. हिमांशु शेखर, उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के निदेशक नरेंद्र सिंह, प्रमुख उद्यमी एस फारुख, विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने दीप प्रज्ज्वलित करके उत्सव का शुभारंभ किया।

रंग हिमालय कार्यक्रम में संबोधन के दौरान बच्चों से वार्ता करते प्रमुख उद्यमी एस फारुख।

दून बिजनेस स्कूल में एग्रीकलचर टीचर कपिल ने अलग-अलग शंखों की ध्वनि से स्पष्ट किया कि विविधता कहां नहीं है। जहां विविधता नहीं है वहां जिंदगी नहीं है।

रंग हिमालय में सर्वधर्म सभा में नन्हीं दुनिया स्कूल के बच्चे।
रंग हिमालय कार्यक्रम में सर्वधर्म सभा में गुरुवाणी का पाठ किया गया।
रंग हिमालय कार्यक्रम में सर्वधर्म सभा

सर्वधर्म प्रार्थना के साथ रंग हिमालय उत्सव ने अगले चरण में प्रवेश किया। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध आदि धर्मों के प्रतिनिधियों ने प्रार्थनाएं कीं। रफैल होम के विशेष बच्चों ने नृत्य प्रस्तुति से जाहिर किया कि वो किसी से कम नहीं हैं। उनके पास भी असंभव को संभव करने का हौसला है।

रंग हिमालय में संगीत विशेषज्ञ एनी तनवीर की म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट पर हार्पसीकोर्ड पर शानदार धुनों के बीच हिमालय की प्रतिकृति को बच्चों और अतिथियों ने तरह तरह के फलों, फूलों और वनस्पतियों से सजाया।
रंग हिमालय में शामिल मानवभारती स्कूल के छात्र-छात्राएं और अन्य स्कूलों से आए बच्चे।

नन्हीं दुनिया के विशेष बच्चों ने हास्य नाटक का मंचन किया, जिसका गीत प्रो. लेखराज उल्फत ने कई वर्ष लिखा था। वहीं शुभम, हिमांशु, शिवम और हाइब्रिड बैंड अंश विकास ने अलग-अलग धुनों पर मनोरंजक प्रस्तुति दी।

रंग हिमालय कार्यक्रम में श्रीमती किरन उल्फत गोयल ने कबीर के भजन पेश किए।
रंग हिमालय में मानवभारती स्कूल के छात्र-छात्राएं

गांधीवादी रमेश शर्मा ने मानवभारती स्कूल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी और कस्तूरबा गांधी जी के जीवन पर चित्रों की प्रदर्शनी लगाई। मंच ने गीतों और कहानियों के माध्यम से दुनिया में शांति और अहिंसा को कायम करने का आह्वान किया।

गांधीवादी रमेश शर्मा ने मानवभारती स्कूल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी और कस्तूरबा गांधी जी के जीवन पर चित्रों की प्रदर्शनी लगाई और बच्चों को संबोधित किया।

मानवभारती स्कूल में रंग हिमालय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जर्मनी से आईं डोरोथी श्रीफ ने छात्र – छात्राओं को संबोधित करते हुए विविधता के रंगों को खास बनाने तथा सामाजिक सरोकारों को बनाए रखने की अपील की। मानवभारती स्कूल के निदेशक डॉ. हिमांशु शेखर ने गांधीवादी रमेश शर्मा और डोरोथी श्रीफ को सम्मानित किया।

डांस फार डायवर्सिटी की आकर्षक प्रस्तुति धरती पर अनियोजित विकास के हमले को प्रस्तुत करने कामयाब हुई। इसमें विकास के साथ बदलती जीवन शैली और फिर उसके प्रभावों का भावपूर्ण मंचन किया गया। इस प्रस्तुति को हर्षित गुप्ता और अभिनव भट्टाचार्य के कोरियोग्राफ किया। इस प्रस्तुति में 50 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया।

मानव भारती स्कूल में रंग हिमालय कार्यक्रम प्रख्यात रंगकर्मी और निर्देशक आलोक उल्फत के निर्देशन में आयोजित किया गया।

इसके साथ ही मध्य प्रदेश स्कूल ऑफ ड्रामा से स्नातक नीरज नेगी के निर्देशन में अभिनव रंगमंच ने वासुदेव कुटंबकम का मंचन किया, जिसमें बदलते परिवेश में तकनीकी के प्रभावों को समझाया गया। बताया गया कि तकनीकी ने दुनिया को एक तो किया है, लेकिन इसके नकारात्मक प्रभाव बड़े कष्टकारी साबित हो सकते हैं। तकनीकी हो चुकी पूरी दुनिया को सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता व एकता को बनाए रखते हुए एक सूत्र में बांधने की परिकल्पना की गई। मंच पर नृत्य और नाट्य प्रस्तुति का समावेश विषय को समझने में मदद करता है।

रंग हिमालय कार्यक्रम में मानव भारती स्कूल के बच्चे।

 

संगीत की धुनों संग भाषायी विविधता

स्कूली बच्चों ने अफ्रीकी, स्पेनिश, कोलंबियाई, यूक्रेन के स्थानीय भाषा के गीतों को एनी तनवीर के निर्देशन में पेश किया। भाषायी विविधता की संगीतमय प्रस्तुति और उत्साह बढ़ाने के लिए तालियों की गड़गड़ाहट।

एक से बढ़कर एक पेशकश, फिर कौन नहीं कहेगा वन्स मोर..। ऐसा ही नजारा पेश आया, मानवभारती स्कूल परिसर में चल रहे रंग महोत्सव में। दून गर्ल्स की छात्राओं ने बढ़े चलो, बढ़े चलो…. गीत से तरक्की के मायनों को समझाया।

 

LEAVE A REPLY