आइए कुछ समय अपने पर्यावरण को दें

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आज पूरी दुनिया पर्यावरण दिवस मना रही है। लगातार बढ़ते प्रदूषण की वजह से दुनिया की आबोहवा सेहत के लिए खतरा बन गई है। पर्यावरण की रक्षा के लिए अपने आसपास के परिवेश को स्वच्छ रखने, नदियों को प्रदूषण से मुक्त करने, जरूरत पड़ने पर ही वाहनों को चलाने सहित तमाम वो कार्य करने होंगे, जिनसे पर्यावरण की सुरक्षा की जा सके। हर घर और हर व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण की पहल करनी होगी। पेड़ पौधों की देखरेख करनी होगी।


संयुक्त राष्ट्र ने पूरी दुनिया में राजनीतिक और सामाजिक रूप से जागरूकता के लिए विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की घोषणा की थी। वर्ष 1972 में 5 से 16 जून तक संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विश्व पर्यावरण सम्मेलन का आयोजन किया था। पहला विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 1973 को मनाया गया। आपको मालूम होगा कि दुनिया में 1.6 अरब लोग वनों पर निर्भर होकर अपनी आजीविका चलाते हैं।


यह बात पूरी तरह सही है कि पर्यावरण की सुरक्षा तभी हो सकती है, जब हर व्यक्ति पहल करेगा। यह सिर्फ किसी सरकारी संगठन की जिम्मेदारी नहीं है। 1972 में संयुक्त राष्ट्र आमसभा और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने कुछ प्रभावकारी अभियानों को चलाने के लिए पहली बार विश्व पर्यावरण दिवस की स्थापना की थी। 1974 से दुनिया के अलग-अलग शहरों में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है।


भारत सरकार का पर्यावरण एवं वन मंत्रालय हर साल 19 नवंबर को इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार प्रदान करता है। इस पुरस्कार में व्यक्ति या संगठन को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।


हिमालय ने दिया हमें जीवन

हिमालय और इसके पर्यावरण ने हमें जीने का आधार दिया है। हम अपने पर्यावरण और इसके विविध रूपों की वजह से खुली हवा में सांस लेते हैं। आप कल्पना कीजिए कि अगर प्रकृति अपनी ये सौगात हमें नहीं देती तो क्या जीवन होता। इसलिए जरूरी है कि हम अपने पर्यावरण का सम्मान करें और प्रकृति के सभी रूपों नदियों, वनों, वायु, धरती को स्वच्छ बनाने में सहयोग दें। प्रदूषणमुक्त आबोहवा हम सभी का अधिकार है औऱ पर्यावरण को स्वच्छ रखना हमारा कर्तव्य भी। इसके लिए कुछ खास नहीं करना है। आपकी और हमारी छोटी सी पहल हम सभी को और आने वाली पीढ़ियों को साफ पर्यावरण और स्वस्थ जीवन दे सकती है।

  • पर्वतीय इलाकों में यात्रा पर आएं हैं तो एक पौधा जरूर लगाएं।
  • अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखें। सड़कों, खाई और नदियों में कूड़ा करकट न फेकें।
  • कूड़ा कचरा निर्धारित स्थानों पर रखे डस्टबीन में ही डालें।
  • प्लास्टिक की बोतलों और पॉलीथिन का इस्तेमाल न करें।
  • जल को बर्बाद न होने दें और जल स्रोतों को संरक्षित करें।
  • नदियों को प्रदूषित न करें। नदियों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए लोगों को प्रेरित करें।
  • वनों की सुरक्षा करें। ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाकर हरियाली को बढ़ावा दें।
  • मेडिकल वेस्ट को खुले में न फेंके, बल्कि सुरक्षित तरीके से डिस्पोज करें।
  • ईंधन बचाएं और प्रदूषण फैलाने वाले वाहन न चलाएं।

उम्मीद है कि आप इस पहल से हिमालय और इसके शानदार पर्यावरण की सुरक्षा में अपना सहयोग देंगे।


हमें पर्यावरण जागरूकता के लिए क्या करना चाहिए

  • हर व्यक्ति को अपने घर और आसपास किसी उत्सव में पौधे लगाने चाहिए। यह आयोजन शादी की सालगिरह, बच्चों का जन्मदिन, शादी समारोह हो सकता है। इस दिन मेहमानों को उपहार में पौधे बांटे जाएं।
  • स्कूलों, कॉलेजों में छात्र, शिक्षक और कर्मचारी महत्वपूर्ण तिथियों और राष्ट्रीय उत्सवों पर पौधे लगाएं। पौधों को रोपने के साथ ही उनकी देखभाल भी जरूरी है। कोई भी छात्र जब स्कूल में नया प्रवेश ले और शिक्षा पूरी करके स्कूल से जाते समय पाैधा लगाए। ताकि पौधेे के माध्यम से स्कूल और छात्र के बीच हमेशा भावनात्मक लगाव बना रहे।
  • अपनी कालोनी में पर्यावरण संरक्षण के लिए समिति बनाई जाए।
  • अपने वाहनों का इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर ही करें।
  • कोई एेसा कार्य न करें, जिससे शोर मचे। घर में किसी उत्सव के दौरान लाउडस्पीकर के इस्तेमाल से बचा जाए।
  • घर पर जल संरक्षण के उपाय जरूर कराएं।

पर्यावरण दिवस की कुछ थीम

  • एक विश्व, एक पर्यावरण
  • जंगल: प्रकृति आपकी सेवा में
  • बहुत सारी प्रजाति, एक ग्रह, एक भविष्य
  • आपके ग्रह को आपकी जरुरत है
  • बर्फ का पिघलना- एक गंभीर विषय है  
  • शुष्क भूमि पर रेगिस्तान मत बनाओ
    ग्रह के लिये योजना बनाएं
  • पृथ्वी को एक मौका दो
  • हमारी पृथ्वी, हमारा आवास, हमारा घर
  • वैश्विक पर्यावरण के लिए एक हो
  • जब लोग पर्यावरण को प्रथम स्थान पर रखेंगे, विकास अंत में आएगा
  • शांति के लिए एक पौधा
  • जनसंख्या और पर्यावरण
  • केवल एक पृथ्वी

पर्यावरण पर किसने क्या कहा

  • पृथ्वी हर मनुष्य की जरूरत को पूरा करता है, लेकिन हर व्यक्ति के लालच को नहीं। – महात्मा गांधी
  • मैं प्रकृति, जानवरों में, पक्षियों में और पर्यावरण में ईश्वर को प्राप्त कर सकता हूं। – पैट बकले
  • भगवान का शुक्र है कि इंसान उड़ नहीं सकता, नहीं तो पृथ्वी के साथ ही आकाश को भी बरबाद कर देता। – हेनरी डेविड थोरियु 
  • पर्यावरण सब कुछ है जो मैं नहीं हूँ। – अल्बर्ट आइंस्टाइन 
  • मैं सोचता हूँ पर्यावरण को राष्ट्रीय सुरक्षा की श्रेणी में रखना चाहिए। अपने संसाधनों की रक्षा करना सीमा की सुरक्षा के समान ही जरूरी है। अन्यथा वहाँ क्या है रक्षा करने को? – राबर्ट रेडफोर्ट 
  • इन पेड़ों के लिये भगवान ध्यान देता है, इन्हें सूखे, बीमारी, हिम्स्खलन और एक हजार तूफानों और बाढ़ से बचाता है। लेकिन वो इन्हें बेवकूफों से नहीं बचा सकता। – जॉन मुइर 
  • पक्षी पर्यावरण का संकेतक होती है। अगर वो परेशानी में है, हम जानते हैं कि हम लोग जल्दी ही परेशानी में होंगे।
    – रोजर टोरी पीटर्सन 

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