मानवभारती स्कूल के छात्रों की डायरीः विज्ञान तो बहुत सरल है…

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  • मानवभारती स्कूल के बच्चों की डायरी में उत्तराखंड विज्ञान केंद्र का एजुकेशनल टूर
  • मानवभारती स्कूल ने कराया, बच्चों को विज्ञान केंद्र का एजुकेशनल टूर

देहरादून। मानव भारती लाइव


मानवभारती स्कूल छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा के लिए फील्ड विजिट कराता रहा है, ताकि बच्चे रुचिपूर्ण तरीके से विषयों का ज्ञान कर सकें। इसी क्रम में गुरुवार को कक्षा आठ के 55 छात्र-छात्राओं को देहरादून के झाझरा स्थित विज्ञान केंद्र का भ्रमण कराया गया। बच्चों ने  विज्ञान केंद्र में जो देखा, उसको अपनी डायरी में लिखा। उनका यह एजुकेशनल टूर कैसा रहा,  आइए उनकी डायरी पर नजर डालें। बच्चे लिखते हैं-

विज्ञान हमारी दिनचर्या का अहम हिस्सा है। इस भ्रमण ने विज्ञान के कठिन समझे जाने वाले नियमों को आसान बना दिया। विज्ञान के नियमों को दैनिक गतिविधियों से जोड़कर देखा तो पता चला कि यह तो बहुत सरल है। हमने विज्ञान केंद्र में मौजूद उपकरणों, मॉडलों के जरिये मनोरंजक तरीके से खुद को विज्ञान के कठिन लगने वाले नियमों, परिभाषाओं और सिद्धांतों के करीब पाया। हम सभी शिक्षकों के निर्देशन में विकासनगर रूट पर झाझरा स्थित उत्तराखंड विज्ञान केंद्र पहुंचे। विज्ञान केंद्र बहुत बड़ा है। इसकी मुख्य इमारत के बाहर का नजारा हम सभी को लुभा गया। वहां हरे भरे पार्क में डायनासोर दिखाई दिए। इनको देखते ही जुरासिक पार्क फिल्म याद आ गई। कंक्रीट के बने ये डायनासोर असली होने का आभास करा रहे थे। यहां तो घूमने के साथ पढ़ाई भी, वास्तव में बहुत अच्छा लगा।

इमारत के मैन गेट पर टिकट लेकर सभी छात्र-छात्राएं विज्ञान केंद्र में दाखिल हुए। यह तो वाकई विज्ञान लोक है। हमारा ध्यान सीधा अपनी विज्ञान की किताबों और उनमें बने चित्रों की ओर चला गया। हम एक -एक करके किताबों और मौके पर मौजूद मॉडलों का मिलान करने लगे। यहां वो सब कुछ हमारे सामने ब़ड़े बड़े मॉडलों के रूप में है, जो हमें टीचर ने पढ़ाया था और पढ़ाया जा रहा है। एयर, साउंड, लाइट, इलैक्ट्रीसिटी के चैप्टर अपने आप आंखों के सामने खुलने लगे। शानदार है यह एजुकेशनल टूर। थैंक्यू टीचर…

विज्ञान केंद्र की मैन बिल्डिंग बहुत ही खूबसूरत है। अन्दर सोलर सिस्टम हमारा इंतजार कर रहा था। मानों कह रहा था कि आओ मुझे देखो, मैं यूनिवर्स हूं। मैं अपने होने का आभास कराता रहा हूं, लेकिन क्या मुझे तुमने कभी देखा है।  सोलर सिस्टम के बारे में हमारी जिज्ञासा बढ़ गई। हम इसके बारे मे ंज्यादा से ज्यादा जानना चाहते हैं। आभासी तारामंडल और अंतरिक्ष के नजारे देखे, जो हमारी कल्पना लोक के लगभग नजदीक हैं। हमने अपनी धरती को थ्री डी फिल्म मे देखा। पृथ्वी कैसे बनी और इस पर जीवन की उत्पत्ति को देखा। एेसा लग रहा था कि मानो एक बार फिर केवल हमारे लिए पृथ्वी पुनः जन्म ले रही है। लाइट और लैंस चैप्टर में पढ़ा था औऱ अपने स्कूल की लैब में भी मिरर और लैंस देखे हैं। यहां पर भी कई तरह के मिरर और लैंस देखने को मिले, जिनमें सभी ने खुद को देखा।यह सब कुछ बहुत मजेदार था।

उत्तराखंड हिमालयी प्रदेश है। हिमालय का निर्माण कैसे हुआ और यहां की संस्कृति, सभ्यता के साथ यहां के जलवायु परिवर्तन और दैनिक गतिविधियों को जानना हमारे लिए बहुत जरूरी है। विज्ञान केंद्र में हिमालयी संसार का आभास कराया गया। हिमालय के भूगोल में होने वाले परिवर्तनों और यहां संचालित होने वाली साहसिक गतिविधियों की गहरी जानकारी मिली। यहां पर्वतीय प्रदेश की संस्कृत, यहां के रहन सहन को दर्शाया गया है। पर्वतीय कृषि, बागवानी से सम्बन्धित विषयों को जानने का मौका मिला। मेडिकल साइंस की गैलरी में स्वास्थ्य और चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान की प्रगति की जानकारी मिली।

विज्ञान केन्द्र के कर्मचारियों और वैज्ञानिकों ने सभी छात्र-छात्राओं को सरल शब्दों में विज्ञान के मॉडलों की जानकारी दी। उनका व्यवहार बहुत अच्छा और सहयोग करने वाला रहा। हमने कम्पयूटर ग्राफिक का कमाल भी देखा। अपने देश के सभी वैज्ञानिकों की खोज औऱ उनके जीवन के बारे में जाना। रसायन विज्ञान के फार्मूलों और परिभाषाओं, सिद्धांतों के साथ नित नई खाेजों का ज्ञान कराने वाली गैलरी को देखा। यहां पर एक ऐसी स्क्रीन लगी है,जो हमारी हिमालय की घाटी में, ताजमहल के सामने, पेरिस के एफिल टावर के पास और रोम में मौ़ेजूदगी को दर्शाती है। आटोमैटिक सेंसर से चलने वाली गाड़ियों के मॉडल भी देखे।

विज्ञान केन्द्र में हमने तीन घंटे बिताए और बहुत सारी जानकारियां लेकर मैन गेट से बाहर पार्क में आए। यहां एक ऐसी दीवार बनी है जो हमें दूर से किसी घर का एहसास कराती है। विज्ञान केन्द्र की चार दिवारी पर भारत और विदेश के वैज्ञानिकों के चित्र बने हैं। अपनी बस में बैठकरह सभी अपने स्कूल की ओर चल दिए। बस में हमने विज्ञान केंद्र की खूब चर्चा की। इस एजुकेशनल टूर के लिए मानवभारती स्कूल मैनेजमेंट, प्रिंसिपल नीना पंत, टीचर बबिता गुप्ता, सोनिया और विपिन सर का थैंक्यू, क्योंकि आज आप सब की वजह से हमें कुछ नया देखने और सीखने का मौका मिला।

 

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