थैंक्यू मानव भारती! आपने पर्यावरण के गांधी जी से जो मिलाया

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मैंने महात्मा गांधी जी को किताबों में देखा है पर आज मुझे पर्यावरण के गांधी जी से मिलने का मौका मिल गया। मैं तो उनको देखती रह गई। मेरी टीचर ने मुझे सुन्दर लाल बहुगुणा जी के बारे में बताया था कि उनकी प्रेरणा से उत्तराखंड में चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई थी। यह वो आंदोलन था, जिसमें पेड़ों को बचाने के लिए महिलाएं और बच्चे पेड़ों से लिपट गए थे। आज पेड़ों को बचाने के लिए जो भी कुछ हो रहा है, उसकी बड़ी शुरुआत तो चिपको ही है, क्योंकि यह आंदोलन पूरे देश में फैला, जिससे पेड़ों की रक्षा होने लगी।

मुझे यह मौका कैसे मिला, इसके बारे में भी तो पूछो दोस्तों। मैं हूं श्री मोई और आज 24 मई, 2019 को मैं देहरादून में हूं। मैं मानवभारती स्कूल पटना में क्लास 8 में पढ़ती हूं। मानव भारती स्कूल देहरादून ने हमें उत्तराखंड के बारे में, यहां के कलचर, एन्वायरन्मेंट को जानने के लिए बुलाया है। बीच-बीच में दोस्तों के साथ कुछ मौज मस्ती भी चलेगी, यह तो बच्चों के लिए बहुत जरूरी है। हां तो मैं बात कर रही थी चिपको आंदोलन की शुरुआत करने वाले बहुगुणा जी की। 92 साल के बहुगुणा जी बच्चों से बहुत प्यार करते हैं। हम जब देहरादून में उनके घर पहुंचे तो वो बहुत खुश हो गए। कहने लगे, आओ बच्चों, मैं तुम्हारा ही इंतजार कर रहा था। तुम तो मेरे लिए तरुणाई का झरना हो। मैं सच बताऊं, मुझे तो तरुणाई का मतलब भी आज पता चला। मैं पूछने ही जा रही थी कि देहरादून के शौर्य ने बहुगुणा जी से पूछ ही लिया, तरुणाई क्या होता है।

बहुगुणा जी शौर्य के सवाल पर मुस्कराते हुए बोले,तरुणाई का मतलब होता है युवा होना। उन्होंने हमें एक कहानी सुनाई कि एक बूढ़ा व्यक्ति अपने दोस्तों से कहता है कि मैं तो तरुणाई के झरने से पानी पीकर आया हूं, इसलिए मैं तो युवा हो गया। बूढ़े के साथी कहते हैं कि हमें भी पिलाओ तरुणाई के झरने का पानी। इस पर वह अपने साथियों से कहते हैं कि मैं तो हाथ लगाकर वहीं पी आया हूं पानी। अपने साथ लाया थोड़े ही हूं। आप सब उस झरने पर जाओ। बहुगुणा जी कहानी सुना रहे थे और सब बच्चे शांत होकर उनको सुन रहे थे।

उन्होंने हंसते हुए कहा, तुम सबसे मिलकर मैं युवा हो गया। दाड़ी पर हाथ लगाते हुए कहने लगे कि मेरी दाड़ी गायब हो गई।  हम सब खूब हंसे। उन्होंने हम से कहा,

आप सब में बहुत ताकत है। आप सभी युवाओं के पास आपकी तीन शक्तियां, आपका हेड यानी मस्तिष्क, जिससे आपके पास नये विचार आते हैं और कुछ रचनात्मक, सकारात्मक सोचते हैं। दूसरा आपका हार्ट यानी दिल, जो स्नेह से लबालब रहता है। आप सबके प्रति प्रेम का भाव रखते हैं। तीसरा आपके हैंड यानी हाथ, जिनसे आप कुछ ऐसा करते हैं, जो दूसरे लिए परोपकार होता है। आपको ये तीनों सामर्थ्यवान बनाते हैं।

आपको पता है बहुगुणा जी, इतने बड़े व्यक्ति हैं और बच्चों के साथ फर्श पर ही बैठे थे। वो हमसे ऐसे मिले, जैसे मानों हमें वर्षों से जानते हों। मेरे जीवन की यह सबसे ज्यादा यादगार मुलाकात है। आगे क्या हुआ, आपको नंदी बताएंगी। अच्छा तो नंदी आप बताएं कि बहुगुणा जी ने बच्चों से क्या कहा।

मैं नंदी हूं और मानव भारती स्कूल पटना में पढ़ती हैं। बहुगुणा जी ने हमसे कहा, आप मुझसे पूछो, क्या जानना चाहते हो। पटना से ही आई अवंतिका ने पूछा, आपको चिपको आंदोलन चलाने का आइडिया कहां से आया। इस पर उन्होंने हमें बताया कि मैंने देखा कि पेड़, जो किसी से कुछ नहीं लेता, बल्कि देता ही है। वह आपको स्वच्छ वायु देता है, खाना देता है, छाया देता है, जल देता है, सबसे महत्वपूर्ण तो आक्सीजन है, जो पेड़ों के अलावा कोई नहीं देता। लेकिन इंसान तो पेड़ों को काट रहा है, उस पेड़ को काट रहा है, जो किसी से कुछ नहीं लेता, बल्कि वो तो दाता है। पेड़ों को तो बचाना होगा। पेड़ों को बचाने के लिए गांव के लोग, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे, पेड़ों से लिपट गए। ठेकेदार के लोग पेड़ों को काटने की हिम्मत नहीं कर पाए।   उन्होंने हमारे साथ प्रकृति के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए गीत ‘धन्यवाद है प्रभु तेरा…’ गाया। बहुत अच्छा लगा उनसे मिलकर।

आपको पता है कि मानवभारती उत्तराखंड-बिहार कम्युनिटी इंगेजमेंट प्रोग्राम में पटना और देहरादून के 50 बच्चों का दल शुक्रवार सुबह उनके रेजीडेंस पर पहुंचा था। पटना के आयुष ने पूछा कि पर्यावरण को बचाने के लिए बच्चे क्या करें। बहुगुणा जी ने कहा, अपनी जरूरतें कम कर दो। पर्यावरण बच जाएगा। पेड़ की पैदावार ही हम सबके जीवन का आधार हैं। आप जानते हैं , पेड़ दस पुत्र के समान होता है। उनसे एक बच्चे ने पूछा कि आपने सभी को आंदोलन के लिए कैसे तैयार किया। बहुगुणा जी ने कहा, दूसरों को जोड़ने से पहले स्वयं से शुरुआत करनी होती है।

इस दौरान बहुगुणा जी के बेटे प्रदीप बहुगुणा जी, जो सीनियर जनर्लिस्ट हैं, ने हमें बताया कि उनके पिता बहुगुणा जी और उनकी माता जी कमला बहुगुणा जी ने कितना संघर्ष किया। वो बता रहे थे कि जब वो छह साल के थे, तो शराब बंद कराने के लिए आंदोलन चल रहा था। उनको भी माता जी के साथ जेल में बंद कर दिया गया था। उन्होंने आंदोलनों के समय होने वाली स्ट्रगल के बारे में बताया। बहुगुणा जी ने अपनी पत्नी कमला बहुगुणा जी के साथ बेटियों को एजुकेशन देने के लिए रात्रिशाला शुरू कीं। उन्होंने महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में बताया। समाज की प्रोग्रेश के लिए उन्होंने बहुत सारे मूवमेंट चलाए। आपको पता है कि चिपको आंदोलन के बाद पूरे देश में पहाड़ों पर पेड़ों को काटने पर रोक लगा दी गई थी। सरकार ने फारेस्ट कंजरवेशन एक्ट बनाया था।

 

बहुगुणा जी ने बच्चों से पूछा कि हमें पेड़ों से क्या मिलता है। बच्चों ने बताया, पानी, हवा, खाना, फल, लकड़ी, छाया और आक्सीजन मिलते हैं। बहुगुणा जी ने बच्चों को शाबास कहा। हमें पता चला कि बहुगुणा जी चावल नहीं खाते हैं। हमने पूछा क्यों, पता चला कि चावल बनाने में काफी पानी यूज होता है, इसलिए वो चावल नहीं खाते। वो सेब भी नहीं खाते, क्योंकि सेब की लकड़ी को काटा जाता है फलों की पेटियां बनाने के लिए। बहुगुणा जी को पद्म विभूषण सम्मान मिला है। उनको स्टाक होम में राइट लाइवलीहुड अवार्ड मिला है, जो नोबेल के समान है। देहरादून के वेदांश, पटना के सक्षम, अक्षय, रागिनी प्रियम, शिक्षक डॉ. अनंतमणि त्रिवेदी, शिक्षिका अन्नू ने भी बहुगुणा जी से कुछ सवाल किए।

बच्चों से बातचीत के बाद मानवभारती के मेंटर राजेश्वर मिश्रा सर, प्रेसीडेंट रजत मिश्रा सर, मानवभारती स्कूल देहरादून के डायरेक्टर डॉ. हिमांशु शेखर सर, मानव भारती स्कूल पटना के डायरेक्टर प्रदीप कुमार मिश्रा सर, मेंटर जगन्नाथ प्रसाद सर ने सुन्दर लाल बहुगुणा जी और उनकी पत्नी विमला बहुगुणा जी को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। मानवभारती ने बहुगुणा जी को दो पौधे दिए, जो उन्होंने बच्चों को भेंट कर दिए। ये पौधे बहुगुणा जी के नाम पर मानवभारती स्कूल पटना कैंपस में लगाए जाएंगे। 9 जनवरी को हर वर्ष हम सभी बच्चे उनके जन्मदिन पर पौधे लगाएंगे, ऐसा संकल्प हमने लिया है। विमला बहुगुणा जी ने बताया कि महात्मा गांधी जी और उनकी शिष्या सरला बेन जी से वो बहुत इम्प्रेश हैं। प्रिंसिपल मैम सुजाता बधानी, प्रिंसिपल सर राजीव सिंघल और विकास झा ने बहुगुणा जी को स्मृति चिह्न प्रदान किया। सभी टीचर्स भी हमारे साथ थे। थैंक्यू मानवभारती आपने हमें विश्व की इतने महान व्यक्ति से मिलाया, जो हमारी प्रेरणा बन गए।

24 तारीख को हम एफआरआई भी गए। वहां भी बहुत अच्छा लगा। वहां से आकर राजेश्वर सर के साथ पूरे दिन की एक्टीविटी पर डिस्कस किया। इन सबके बारे में कल आपको कुछ बताना है, अभी इतना ही थैंक्यू फ्रैंड्स, थैंक्यू टीचर्स।

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