मणि सर आपकी ये बातें तो लुभा गईं हमको

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हम सब पटना पहुंच गए पर आपसे बातें लगातार होती रहेंगी। मानवभारती कम्युनिटी इंगेजमेंट प्रोग्राम 2019 के सफर में हमें बहुत सारी जानकारियां मिलीं, जिनके बारे में हम बताते रहे। कुछ और बातें आपसे साझा करना चाहते हैं, जो अभी तक नहीं कर पाए थे।

हम अपने मम्मी पापा को छोड़कर इतनी दूर उत्तराखंड आए हैं। मेरी मम्मी तो मुझे अपने से दूर नहीं होने देती। वो मुझे बहुत प्यार करती हैं। मुझे बहुत याद कर रही होंगी। मुझे कुछ सिखाने के लिए उन्होंने मुझे यहां भेजा, यह उनका त्याग ही है। मैं अपने मम्मी पापा को पटना छोड़कर आया हूं, यह मेरा त्याग है। क्लास 5 के संपूर्णानंद की इस बात को सभी शिक्षक और बच्चे बड़े गौर से सुन रहे थे। मौका था, अंघेला हिल्स ग्रीन स्कूल में डॉ. अनंतमणि त्रिवेदी सर के सत्र का, जिसमें बच्चों और शिक्षकों के साथ नैतिक शिक्षा पर चर्चा चल रही थी। मणि सर त्याग, शील, गुण और कर्म पर उदाहरणों के साथ संवाद कर रहे थे।

त्याग पर चर्चा हुई तो सभी से कहा गया कि अपने जीवन में त्याग का कोई उदाहरण दीजिए। संपूर्णानंद ने तो अपने त्याग को बता दिया, अब किसी शिक्षक को बताना था कि उनकी नजर में त्याग क्या है। मानव भारती स्कूल पटना की प्रिंसिपल सुजाता मैम ने कहा, त्याग वही है, जो किसी को खुशी दे। मैंने तो इसको महसूस किया है। मुझे अपनी एक साड़ी खूब पसंद थी। एक दिन मेरी बहन घर आई और उनको यह साड़ी पसंद आ गई। उन्होंने मुझसे कहा, दीदी आपकी साड़ी बहुत अच्छी है, आप अपने लिए कोई और खरीद लेना, मुझे यह दे दो। मैं नहीं चाहती थी कि यह साड़ी बहन को दी जाए।

मैंने सोचा कि इसके और मेरे पास एक से बढ़कर एक साड़ियां हैं। लेकिन फिर भी यह साड़ी हम दोनों की पसंद है। मेरे सामने सवाल था कि बहन को यह साड़ी दी जाए या नहीं। काफी विचार करके मैंने उनसे कहा, ठीक है, तुम्हें पसंद है तो रख लो। वह बहुत खुश हुई, क्योंकि मैंने उनकी आंखों में जो चमक देखी, वह मेरे लिए तो बहुत अमूल्य थी। अपनी बहन को एक साड़ी देकर मैंने बहुत बड़ा काम नहीं किया, लेकिन अपनी प्रिय वस्तु किसी को देना त्याग की श्रेणी में ही आएगा। मानवभारती स्कूल देहरादून अवंतिका क्लास 6, अंकुर क्लास 7, शिवांगी क्लास 7 और टीचर अनुराधा मैम व सुचिता मैम, उत्कर्ष भैया ने भी त्याग और धैर्य पर उदाहरण दिए।

मणि सर ने शील यानी शिष्टाचार पर चर्चा करते हुए कहा कि हम सभी को अपने से बड़ों का सम्मान करना चाहिए और अपने से छोटों को भी स्नेह करना चाहिए। क्लासरूम और क्लासरूम से बाहर भी शिक्षक और छात्र के बीच शिष्टाचार एक प्रमुख आवश्यकता है। घर और समाज में भी शिष्टाचार की जरूरत वर्तमान में तो ज्यादा महसूस की जा रही है। उन्होंने कहा, जीवन के हर पहलू में धैर्य कभी नहीं छोड़ना चाहिए। धैर्य आपकी वो शक्ति है, जो सफलता की ओर ले जाती है। यह आपको विषय के प्रति जागरूक भी बनाता है।

धैर्य पर मानव भारती स्कूल पटना की टीचर अन्नू शर्मा मैम ने कहा कि पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद वह पीएचडी करना चाहती थीं। पीएचडी करने से पहले ही शादी हो गई। शादी के बाद पढ़ाई लिखाई लगभग छूट गई थी। मुझे बड़ा दुख हुआ कि मेरा सपना पूरा नहीं हो पाएगा। लेकिन मैंने धैर्य नहीं खोया और एक समय ऐसा भी आया कि मुझे पीएचडी की तैयारी का मौका मिल गया। मैंने पीएचडी की है और आज मानव भारती स्कूल में शिक्षिका हूं। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। अगर उस समय धैर्य खो देती तो आज आपके सामने अपनी बात नहीं रख रही होती।

इसी सत्र में राजेश्वर सर ने एक कहानी सुनाई- हजरत निजामुद्दीन ओलिया की दरगाह के पास एक बच्चा लोगों से भीख मांगता था। एक दिन एक महिला ने उसको 13 रुपये दिए और कहा कि तुम इससे कुछ खरीदों और बेचो। लेकिन भीख मत मांगो, यह बहुत गलत बात है। बच्चे ने महिला की बात मानी और कुछ मोर पंख खरीद लिए। पंखों को बेचकर कुछ पैसे कमाए और धीरे -धीरे वह अन्य कार्य करने लगा। एक समय ऐसा भी आया, जब उसके पास धन की कमी नहीं थी। इस कहानी को यहीं रोक कर शिक्षकों और बच्चों से पूछा गया कि इस धन का उसने क्या किया होगा। किसी ने कहा, उसने अपनी सुविधाएं बढ़ा ली होंगी। उसके पास बड़ा घर होगा। उसके पास बहुत सारे नौकर होंगे। उसने अपने व्यवसाय को बढ़ाया होगा। इनमें से ही एक बच्चे का कहना था कि उसने उस महिला की मदद की होगी, जिसने उसे 13 रुपये दिए थे। इससे यह निष्कर्ष निकला कि बच्चे कितना अच्छा और व्यवहारिक सोचते हैं।

मणि सर ने गुण पर चर्चा में महाभारत की सूक्ति- शत्रोरपि गुणाः ग्राह्याः, इसका अर्थ है- शत्रुओं से भी गुण ग्रहण करने चाहिए, का जिक्र किया। गुण ही व्यक्ति को महान बनाते हैं। नैतिक शिक्षा के पूरे सत्र का विश्लेषण किया गया, जिसके आधार पर डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि सभी को अपने क्षेत्र में समर्पण के साथ बिना किसी स्वार्थ के कर्म करना चाहिए। कर्म में कर्तव्य का होना जरूरी है, क्योंकि अधिकार भी कर्तव्य के पालन से ही मिलता है। अंत में उन्होंने कहा कि विश्व में पहचान बनाने के लिए आदर्श होना, चरित्रवान होना, संतुलित जीवन शैली का होना अत्यंत आवश्यक है। पटना मानवभारती स्कूल के डायरेक्टर प्रदीप सर, फाउंडेशन स्कूल के प्रिंसिपल विकास सर, एडवाइजर जगन्नाथ सर, देहरादून मानवभारती स्कूल के प्रिंसिपल राजीव सर भी हमारा उत्साह बढ़ाने के लिए चर्चा में शामिल रहे।

बहुत अच्छा लगा आपकी वो बातें सुनकर, जो हमारी लाइफ में बहुत काम आएंगी। इसके लिए मानवभारती को बहुत सारी थैंक्यू। मणि सर, आपकी ये बातें तो हमें बहुत पसंद आईं, हम इनको अपने जीवन में जरूर उतारेंगे। थैंक्यू सर।

 

 

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