प्रीतम भरतवाण सर, आपको बार-बार सुनना चाहता है पटना

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बेटा आप क्या बनना चाहते हो। जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण सर ने मानवभारती स्कूल देहरादून की क्लास 6 की अवंतिका से यह सवाल पूछा।  अवंतिका ने जवाब दिया, मैं बैंक मैनेजर बनना चाहती हूं। इस पर पूरे हॉल ने अवंतिका के सपने का स्वागत किया और भरतवाण सर ने कहा, आपने जो ठान लिया है, उसके लिए मेहनत करोगी तो आप बैंक मैनेजर जरूर बन जाओगी। मेरी तरफ से आपको बहुत सारी शुभकामनाएं। उन्होंने कहा कि आधे अधूरे मन से कुछ न करें, जो करें पूरे मन से करें, सफलता आपका इंतजार करेगी।
पहले तो मैं आपको बता दूं कि पद्म श्री प्रीतम भरतवाण सर की बच्चों से मुलाकात के बारे में बताने की जिम्मेदारी मुझे दी गई है। मैं हूं मानव भारती स्कूल, पटना का छात्र अक्षत। हमारा आज देहरादून में तीसरा दिन था। हमें जब बताया गया कि आपको उत्तराखंड में जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण सर से मिलना है और उनसे कुछ ऐसे सवाल पूछने हैं, जिनके जवाब आपको इन्सपायर कर दें। मेरी टीचर ने बताया कि भरतवाण सर के बारे में उन्होंने इंटरनेट पर काफी जानकारी जुटाई है। क्या गाते हैं भरतवाण सर। उनके तो कई देशों में फैंस हैं। वहां की यूूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स को उत्तराखंड के इंस्ट्रूमेंट्स और कलचर की एजुकेशन देते हैं। हम बच्चों के साथ टीचर्स भी उनसे मिलने के लिए खुश थे।
मानव भारती स्कूल देहरादून को थैंक्यू, आपने हमें भरतवाण सर से मिलवाया और उनके साथ बात करने का मौका दिया। हां तो मैं बात कर रहा था अवंतिका के सवाल की। अवंतिका ने अपना सपना बता दिया। अब बारी देहरादून के शौर्य की थी, शौर्य ने कहा, मैं तो डांसर बनना चाहता हूं। हां, वही शौर्य जो बस में जाते हुए डांस कर रहा था। मुझे तो लगता है कि शौर्य डांसर बनेगा, वह भी नेशनल लेवल पर खूब फेमस होगा। भरतवाण सर ने शौर्य से कहा, बेटा मेहनत करो, पर किसी की देखा देखी मत करना। हर बच्चे में कोई खास टैलेंट होता है, जो नेचुरल होता है। वह अपने टैलेंट को पहचाने और उस डायरेक्शन में मेहनत करे, सक्सेस मिलकर रहेगी। उन्होंने शौर्य को बहुत सारी शुभकामनाएं दीं।
  
मैंने भी उनसे एक सवाल पूछा कि आपको इंस्ट्रूमेंट या सिंगिंग में से कौन सबसे ज्यादा अच्छा लगता है। भरतवाण सर ने कहा, मुझे तो दोनों पसंद हैं, क्योंकि ये दोनों एक दूसरे के लिए बने हैं। देहरादून के क्लास 6 के दिव्यांशु ने पूछा, आपको अपने सभी गीतों में सबसे ज्यादा कौन सा पसंद है। भरतवाण सर ने बताया, किसी भी कलाकार को अपनी सभी क्रियेटिविटी पसंद होती हैं। मुझे भी अपने सभी गीत पसंद हैं। आपको बता दूं कि मेरे सभी गीतों को लोगों का बहुत प्यार मिला। इस पर एक स्टूडेंट की डिमांड पर उन्होंने गाना ‘सरुली मेरू जिया लगीगे, तेरी रौंतेली मुखड़ी मां…’ सुनाया। ंमुझे गाने के बोल समझ नहीं आए पर यह सोचकर मैं बहुत खुश हुआ कि एक ग्रेट आर्टिस्ट, जिनको दुनिया के लोग प्यार करते हैं, हम बच्चों के लिए गाना सुना रहे हैं, वो भी वह गाना, जिसको करोड़ों लोग पसंद करते हैं। उन्होंने मां जगदंबे की स्तुति करते हुए जागर भी प्रस्तुत किया।
अच्छा तो अब आपको देहरादून की शिवांगी बताएंगी कि भरतवाण सर ने और क्या कहा बच्चों को इन्स्पायर करने के लिए। अक्षत थैंक्यू, मैं शिवांगी मानवभारती स्कूल देहरादून की क्लास सेवन की स्टूडेंट हूं। भरतवाण सर ने एक सवाल पर बड़ा मजेदार किस्सा सुनाया। मेरी टीचर तो कहती हैं कि आर्प्युचिनिटी बार- बार  नहीं मिलती। भरतवाण सर 13 साल के थे, जब उनके गांव सिल्ला में मेला लगा था। मेले में एक बड़े गायक को बुलाया गया था। उनको सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। वो बड़े गायक वहां पहुंचे और गाने से मना कर दिया। वो स्टेज सही नहीं होने की बात कह रहे थे। गाना नहीं सुन पाने की वजह से गांव वाले काफी निराश हो गए। भरतवाण सर कम उम्र के थे, पर गाते बहुत अच्छा था। इससे पहले उन्होंने कभी इतने सारे लोगों के सामने गाना नहीं गाया था। घर पर गाते थे। जब लोग निराश हो गए तो मेले वालों ने उनसे बात की। भरतवाण सर ने तुरंत हां करते हुए कहा कि मैं गाऊंगा। उन्होंने स्टेज पर एक गाना सुनाया, जो लोगों को काफी पसंद आया। बस फिर क्या था भरतवाण सर ने एक के बाद एक करके सात-आठ गाने सुना दिए। तब से उनको और भी अवसर मिले, आज तो आप जानते ही हैं भरतवाण सर की फैंस फालोइंग के बारे में। इसलिए कहते हैं कि आर्प्युचिनिटी का वेलकम करो।
आपको बता दूं कि यह इंपोर्टेंट बात उन्होंने पटना की छात्रा यशस्वी शुक्ला के सवाल पर कही। यशस्वी ने उनसे पूछा था कि जब आप विदेश में पहली बार परफोर्मेन्स के लिए गए तो आपको कैसा लगा। अपनी लाइफ की कोई आर्प्युचिनिटी बताएं, जो हमें सभी को इन्स्पायर करे। भरतवाण सर ने बताया कि पहली बार विदेश ओमान गया, जहां उत्तराखंड के निवासियों ने उनकोे इन्वाइट किया था। इसके बाद उनको यूएस, कनाडा, जर्मनी, दुबई, आस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड में इन्वाइट किया गया। विदेश की कई यूनिर्वसिटी में विजिटिंग प्रोफेसर हैं और वहां के स्टूडेंट्स को उत्तराखंड के म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट और सॉंग के साथ कलचर की एजुकेशन देते हैं।
पटना स्कूल की एक स्टूडेंट से उन्होंने पूछा कि बेटा आप क्या बनना चाहती हो, तो आंसर मिला, मैं डॉक्टर बनूंगी। मेरा साइंस में काफी इंटरेस्ट है। भरतवाण सर ने कहा, बहुत अच्छा बेटा, आप सफल हों। लेकिन किसी के प्रेशर में आकर आप अपने नेचुरल टैलेंट को मत खोना। अगर किसी बच्चे को जिसमें एक अच्छा सिंगर बनने का टैलेंट है और हम उसको क्रिकेटर बनाना चाहें तो यह सही नहीं है। आजकल ऐसा हो रहा है कि पैरेंट्स अपनी इच्छाएं बच्चों पर थोप रहे हैं, ऐसा बिलकुल भी नहीं होना चाहिए। उन्होंने हमें समझाते हुए कहा कि मान लो कि जहां आप अच्छा परफार्म कर सकते हैं, को छोड़कर इधर उधर आधे अधूरे मन से किसी भी फील्ड में मेहनत कर रहे हैं। यह ठीक उसी तरह है कि पानी की तलाश में कहीं भी बोरिंग कर रहे हैं, लेकिन मिल कुछ नहीं रहा है। हमें सोचना होगा कि हम उसी टारगेट के लिए परफार्म करें, जो हम बहुत अच्छे से कर सकते हैं। जगह- जगह पानी के लिए दस हजार फीट से ज्यादा बोरिंग कर दिया, लेकिन मिला कुछ नहीं। अगर इसी बोरिंग को केवल वहीं करते, जहां पानी है, तो हमें एक हजार फीट गहराई में ही पानी मिल जाता। इसलिए एफर्ट वहीं करें जहां सफलता ज्यादा से ज्यादा हो।
भरतवाण सर ने कितनी शानदार बात कही। सभी बच्चों ने तालियां बजाकर उनकी इस बात का वेलकम किया। उन्होंने एक और बात बताई, जिससे हमें लगा कि हमें भी ऐसा करना चाहिए। अंकुर अब आप बताओ, उन्होंने क्या कहा। फ्रैंड्स मैं अंकुर मानव भारती स्कूल देहरादून में क्लास सेवन का स्टूडेंट हूं। भरतवाण सर ने एक बात बताई कि वो एक से बढ़कर गीत लिखने के लिए कितना परिश्रम करते हैं। उनमें अपने कार्य को लेकर कितना जुनून है। परिश्रम और जुनून शब्दों का मतलब टीचर ने समझाया है, इसलिए इनको मैं यहां यूज कर रहा हूं। उन्होंने छह माह तक लगातार बहुत मेहनत करके वन फिफ्टी सांग लिखे। आपको मालूम है कि भरतवाण सर, गाने लिखते भी हैं। एक से बढ़कर एक इंस्ट्रूमेंट पर उनकी परफार्मेन्स को देखकर और सुनकर लोग झूमने लगते हैं। हां, तो मैं बता रहा था कि उन्होंने वन फिफ्टी में से बेस्ट आठ गाने सेलेक्ट किए। इन आठ में से भी एक को सेलेक्ट किया, जिसको दुनिया ने पसंद किया। उन्होंने अपने लिखे ये सभी आठ गाने गाए। ‘सरुली मेरू जिया लगीगे, तेरी रौंतेली मुखड़ी मां…’ ने तो सारे रिकार्ड तोड़ दिए। इसके बाद तो उनके 35 एलबम आ गए, एक से बढ़कर एक। भरतवाण सर पूछते हैं कि कोई भी काम, हम क्यों नहीं कर सकते। अपने कार्य को लेकर जुनून होना चाहिए तो हम सबकुछ कर सकते हैं। पटना स्कूल की अमरीन ने उनसे पूछा कि आपने किस उम्र में गाना शुरू कर दिया। भरतवाण सर ने कहा कि सात साल की आयु से। उनको संगीत की कला पिता जी और दादा जी से विरासत में मिली है। उन्होंने एक बात और कही कि मैं पटना- बिहार को काफी पसंद करता हूं। आप जानते हैं कि बिहार ने देश को सबसे ज्यादा ब्यूरोक्रेट्स दिए हैं।
मानव भारती के मेंटर राजेश्वर सर ने भी हमें आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि बच्चे प्रतिभावान होते हैं। सभी बच्चों के सपने पूरे होंगे और वो देश का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने बच्चों और भरतवाण सर को धन्यवाद किया, जिनके संवाद में बहुत सारी नई जानकारियां मिलीं। भरतवाण सर ने हमसे वादा किया कि वो पटना आएंगे और हमसे फिर मिलेंगे। हमने भी उनसे कहा, सर आपसे बार-बार मिलना चाहेंगे। आपको याद करते रहें इसलिए आपका 11 सितंबर को मानवभारती पटना स्कूल में आपका जन्मदिन समारोह मनाएंगे। आप आओगे तो हमें बहुत अच्छा लगेगा सर।
मानवभारती के मेंटर राजेश्वर सर और प्रेसीडेंट रजत सर ने भरतवाण सर को दो पौधे दिए, जो उन्होंने देहरादून और पटना स्कूल के बच्चों को भेंट किए। ये पौधे भरतवाण सर के नाम पर देहरादून और पटना के स्कूलों में लगाए जाएंगे। मानव भारती के अध्यक्ष रजत मिश्रा, मानवभारती स्कूल देहरादून के निदेशक  डॉ. हिमांशु शेखर, पटना के निदेशक प्रदीप कुमार, पटना की प्रिंसिपल सुजाता बधानी, देहरादून के प्रिंसिपल राजीव सिंघल, सलाहकार जगन्नाथ प्रसाद, विकास झा ने उनसे आग्रह किया कि वो पटना आएं। पटना के बच्चों ने कहा, आप जब भी बिहार आएं तो हम से मिलकर जरूर जाना। हम आपको बार-बार पटना आने के लिए इन्वाइट करते हैं सर। हमने आपसे उत्तराखंड के बारे में जाना, आप हमसे बिहार के बारे में जानिएगा।  भरतवाण सर, आप पटना आ रहे हैं न। थैंक्यू मानवभारती, आपने हमें देश दुनिया की ग्रेट पर्सनालिटी से मिलाया। थैंक्यू अगेन एंड अगेन।

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