कैशलेस सिस्टम सही है या गलत

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देहरादून। मानवभारती लाइव

भारत में कैशलेस सिस्टम यानि घर बैठे ही सुविधाओं और सेवाओं से कनेक्ट होना। बैंक, बाजार, अस्पताल, बिजली, पानी, फोन की बिलिंग, हवाई या रेलवे सेवाओं की टिकट लेने सहित कई कार्यों में कैशलेस सिस्टम काम कर रहा है। सामान्य तौर पर एक दूसरे को रकम ट्रांसफर करने में कैशलेस सिस्टम काम आता है। घर बैठे ही क्लिक करते हुए मनी ट्रांसफर। कैश को यहां से वहां ले जाने की परेशानी से भी छुटकारा मिल गया। वहीं इससे जुड़े कई तकनीकी पक्ष भी हैं, जिनका ज्ञान होना बहुत जरूरी है। सतर्कता भी आवश्यकता है। ऐसे में कैशलेस सिस्टम की खामियों पर भी चर्चा हो रही है।

भारत में कैशलेस सिस्टम समाज की अवधारणा सही या गलत, विषय पर मानवभारती स्कूल के सानिया जैदी और मानस खंडूड़ी ने पक्ष और विपक्ष में अपनी बात कही। अवसर था स्वामी विवेकानंद स्कूल जोगीवाला में वाद-विवाद प्रतियोगिता का। पक्ष में सानिया जैदी ने कहा कि दुनिया तेजी से तरक्की कर रही है और हम इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि भारत मे कैशलेस व्यवस्था सही है या गलत। यह व्यवस्था तो बहुत पहले हो जानी चाहिए थी। इस तकनीकी युग में कैशलेस सिस्टम बहुत कारगर है।

यह सुविधा समय की बचत करती है और फिर मुद्रा का सही उपयोग कराती है। कैशलेस ट्रांजिक्शन रिकार्डेड होता है और इससे टैक्स चोरी होने की आशंका ही नहीं रहती। टैक्स से ही तो देश में विकास कार्य संभव होते हैं। आपको बाजार से कुछ खरीदना है तो कैशलेस ट्रांजिक्शन करें। बिल जमा करने के लिए लाइन में लगने से अच्छा है कि घर बैठे ही कैशलेस सिस्टम का इस्तेमाल करें। यह सेवाएं 24 घंटे जारी रहती हैं। मेरी राय में कैशलेस सिस्टम बहुत अच्छा है।

विषय के विपक्ष में मानस खंडूड़ी ने कहा कि भारत में सभी व्यक्ति स्मार्ट फोन नहीं रखते और न ही कंप्यूटर का इस्तेमाल करना जानते हैं। छोटे दुकानदारों की व्यवस्था बिना कैश के काम नहीं कर सकती। कैशलेस सिस्टम को अपनाने के लिए तकनीकी का ज्ञान होना जरूरी है। ट्राई (टेलीकॉम रेग्युलैटरी अथॉरिटी अॉफ इंडिया) के अनुसार देश में लगभग 70 करोड़ लोगों के पास मोबाइल फोन हैं। मोबाइल फोन की बात कर रहा हूं, स्मार्टफोन वालों की संख्या कम होगी। मोबाइल ही कैशलेस ट्रांजिक्शन का सबसे सुलभ साधन है।

ठीक है बिलिंग, अस्पताल, बैंक और मॉल में कैशलेस सिस्टम काम करता है,लेकिन रोजाना के लेन-देन, जैसे दूध, सब्जी या किराने के सामान की खरीदारी में यह सिस्टम काम नहीं कर पाता। कैशलेस व्यवस्था में क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड से पेमेंट की बात की जाती है, लेकिन इनके इस्तेमाल पर चार्ज लगता है। वहीं नेटबैंकिंग, क्रेडिट कार्ड से भुगतान, एटीएम कार्ड के इस्तेमाल से कई बार साइबर धोखाधड़ी के मामले सामने आते रहे हैं। मेरी राय में कैशलेस व्यवस्था को लागू करना सही नहीं है।

 

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