संस्मरणः अटल जी का आशीर्वाद

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  • डॉ. अनंतमणि त्रिवेदी

मार्च 1995 में भारतीय संस्कृत महासम्मेलन ने लखनऊ में सेमिनार का आयोजन किया था। उन दिनों मैं वाराणसी में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय का छात्र था। मुझे भी सेमिनार में अपने शिक्षकों और मित्रों के साथ शामिल होने का अवसर प्राप्त हुआ था। सेमिनार में अटल बिहारी वाजपेयी जी मुख्य अतिथि थे। मैंने मंच से मंगल श्लोक वाचन करने के बाद संस्कृत में संबोधित किया।

मुझे याद है कि वाजपेयी जी ने मुझे अपने पास बुलाकर मेरी पीठ थपथपाई और कहा कि खूब आगे बढ़ो। बाद में उन्होंने मेरे शिक्षक राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित पं. वासुदेव द्विवेदी शास्त्री को पत्र लिखकर मेरी प्रशंसा की थी। मुझे उनका आशीर्वाद मिला और उनके वचनों से प्रेरणा हासिल हुई। आज भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी हमें हमेशा के लिए छोड़ गए हैं, लेकिन उनका स्नेह और प्रोत्साहन जीवन में आगे बढ़ने की ऊर्जा देते रहेंगे। आज हम सब मिलकर महान जननायक अटल बिहारी वाजपेयी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।

1 COMMENT

  1. पढ़कर प्रसन्नता हुई।
    भगवत्कृपा से आप सदैव सन्मार्ग की ओर अग्रसर होते रहें।
    मेरी अनंत शुभकामनाएँ।

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