अंघेला ग्रीन स्कूलः प्रकृति सब सिखाती है 

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अंघेला ग्रीन स्कूल का वातावरण सीखने के लिए प्रेरित करता है। अंघेला स्कूल का खुला और समन्वयपूर्ण वातावरण प्राकृतिक विविधता के जरिये शिक्षा हासिल करने में मदद करता है। यह न केवल क्षमताओं को बढ़ाता है, बल्कि जीने के लिए जरूरी उस स्थाई मार्ग को प्रशस्त करता है, जो मानवता की सेवा की ओर जाता है।

कोई भी मनुष्य अपने आसपास के माहौल से बहुत जल्दी प्रभावित होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने सिखाने की प्रक्रिया में प्रकृति, मानव और समुदाय को अहम रूप से शामिल किया है। हमारे आसपास जो भी कुछ दिखता है या हमारे दैनिक क्रियाकलापों का हिस्सा है, वो सभी प्रकृति से हासिल होता है। ये वस्तुएं चाहे जैविक हो या अजैविक, सभी प्राकृतिक तत्वों से मिलकर बनी हैं।

हम जानते हैं कि विज्ञान की कोई ऐसी ब्रांच नहीं है, जिसके मूल में प्राकृतिक घटनाएं नहीं हैं। विज्ञान की हर अवधारणा के मूल में प्रकृति है। सूचना औऱ तकनीकी प्रौद्योगिकी ही नहीं बल्कि सभी उद्योगों का विज्ञान प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित है। वास्तव में सीखने की हर प्रक्रिया के केंद्र में प्रकृति है।

अब यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्रकृति की अवधारणाओं पर आधारित सीखने और जानने की प्रक्रिया को कैसे शुरू किया जाए और इसकी निरंतरता को कैसे बनाए रखें, ताकि यह पूर्ण शिक्षा के उद्देश्यों को पूरा कर सके।

अंघेला हिल्स में सीखने और जानने की इसी प्रक्रिया पर पूरा फोकस किया गया है और शिक्षा के लिए हमारी सभी पहल इसी नजरिये से परिलक्षित होती है। इसके लिए हम प्रकृति का आभार व्यक्त करते है। अंघेला में प्रकृति और उसके नियमों पर आधारित शिक्षा का यही दर्शन जीवन की हर गतिविधि को सकारात्मक और रचनात्मक पहलू प्रदान करता है।

शरीर, मस्तिष्क और आत्मा व्यक्तित्व को दर्शाते हैं। इन तीनों तत्वों का सामंजस्य किसी भी व्यक्ति के विकास के लिए आधार तैयार करता है। अंघेला हिल्स स्कूल में व्यक्तित्व विकास पर व्यापक दृष्टिकोण से काम किया जाता है। इसके तहत छात्रों के आचरण, भावनात्मक परिपक्वता के लिए जरूरी तत्वों पर ध्यान दिया जाता है। स्कूल की टीम ने व्यक्तित्व विकास के लिए एक एेसा सिस्टम विकसित किया है, जो कैंपस में उनके विषयों के प्रति दृष्टिकोण औऱ जीवन शैली में दिखता है। हमें विविध संस्कृतियों और परंपराओं से भी कुछ सीखने से परहेज नहीं है।

व्यक्तित्व का एक अहम पहलू शारीरिक रूप से फिट रहना भी है। शारीरिक स्फूर्ति के लिए एेरोबिक्स औऱ योगाभ्यास पर जोर दिया जाता है। आर्गेनिक सब्जियों औऱ फलों के संतुलित आहार से फिजीकल फिटनेस पर ध्यान दिया जाता है। इसके साथ ही स्टाफ के मार्गदर्शन में वाशिंग, बागवानी, कुकिंग जैसी गतिविधियों के लिए छात्रों को प्रोत्साहित किया जाता है। मानसिक रूप से सतर्क रहने के लिए निरंतर अभ्यास और अनुशासन को तव्वजो दी जाती है।

यह हमारी जिम्मेदारी है कि हर बच्चे में उन सभी गुणों को विकसित करें, जो उसके व्यक्तित्व को बहुआयामी बनाने में सहायक हों। उनको बौद्धिक रूप से मजबूत बनाकर अपने अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों का बोध कराना ग्रीन स्कूल का उद्देश्य है। सामाजिक सरोकारों वाली अर्थपूर्ण शिक्षा मे अभिभावकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अभिभावकों और शिक्षकों में समन्वय अत्यंत जरूरी है, क्योंकि यह शिक्षा के बहुआयामी उद्देश्यों को पूरा करने में सहयोगी होता है। इनमें संवाद को ग्रीन स्कूल की शिक्षा पद्धति में वरीयता दी गई है। सूचनाओं और फीडबैक के लिए सिस्टम विकसित किया गया है।

समय-समय पर माता पिता के साथ व्यक्तिगत तौर पर फोन और इंटरनेट के जरिये बात की जाती है। इस अहम प्रक्रिया में अभिभावक बच्चों के कमजोर पक्षों को मजबूत बनाने और उनकी प्रगति के बारे में चर्चा करते हैं। इससे शिक्षक और अभिभावक एक दूसरे के नजरिये को समझते हैं और यह बच्चों को पढ़ाने और सिखाने में बखूबी इस्तेमाल होता है।

हर अभिभावक अपने बच्चों से अपेक्षाएं और उम्मीदें रखते हैं। यह वक्त के साथ बढ़ती जाती है। अभिभावकों के साथ बातचीत से प्राप्त निष्कर्ष हर बच्चे का रिकार्ड बनाने में मदद करता है। यह सब कुछ शिक्षक, माता, पिता और बच्चे को समझने में मदद करता है और संवादहीनता की कोई गुंजाइश नहीं रहती। यह सब इसलिए भी है, क्योंकि हम जानते हैं कि परस्पर संवाद सीखने और सिखाने, एक दूसरे से तालमेल बनाने में सहायक होता है। इसके लिए सूचना और संचार तकनीकी को बेहतर इस्तेमाल किया जाता है।

हम इस बात पर विश्वास नहीं करते कि बच्चों को बड़े ही सीखा सकते हैं। बच्चों में नई जानकारियों, सूचनाओं और ज्ञान का संचार आसपास के माहौल, पर्यावरण और प्रकृति के विविध रंगों और क्रियाकलापों से भी होता है। हां, इतना जरूर है कि बच्चों को सिखाने के लिए बड़े सुविधाएं प्रदान कर सकते हैं। उनका मार्गदर्शन कर सकते हैं। ग्रीन स्कूल में बच्चे और बड़े दोनों मिलकर रोजाना, हर पल कुछ नया सीखते हैं और एक दूसरे को सिखाते हैं। इसमें सीखने की प्रक्रिया अनवरत रहती है। यहां शिक्षण किसी के लिए नौकरीभर नहीं है, बल्कि उनके लिए शिक्षण एक जुनून की तरह है, जिसके लिए वो उत्साह और रचनात्मकता के साथ काम करते हैं। ये शिक्षक अलग-अलग आयु वर्गों और पृष्ठभूमि के सकारात्मक नजरिये वाले हैं, जो एक मार्गदर्शक और संरक्षक की तरह काम करते हुए शिक्षा प्रदान करते हैं। इसके लिए वर्कशॉप, ट्रेनिंग सेशन और विविध तरह के रचनात्मक क्रियाकलापों का आयोजन किया जाता है।

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