हम तो आपके जबर्दस्त फैन हो गए आलोक उल्फत सर

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आलोक उल्फत सर और थियेटर, दोनों को एक दूसरे का पूरक कहा जाए तो गलत नहीं होगा। ऐसे हमने सुना है और आज मानव भारती ने हमें वो मौका भी दे दिया कि हम उनको देखें, सुने और अपनी जानकारियों को बढ़ाने के लिए उनके साथ कुछ एक्टीविटी करें। उत्तराखंड बिहार कम्युनिटी इंगेजमेंट प्रोग्राम 2019 के दौरान हमने वो सबकुछ सीखा और समझा, जो हम सबके कल को सुनहरा करेगा साथ – साथ। आलोक उल्फत सर से मुलाकात में एक एक्टीविटी मुझे खूब पसंद आई, वो है सबको संग लेकर चलो। जब हम साथ गा सकते हैं तो क्या हम एक साथ बदलाव नहीं कर सकते। मैंने तो उसी समय खुद से कहा, हम एक दूसरे के साथ मिलकर बदलाव करेंगे। हमें बदलाव करना होगा, उस व्यवस्था में जो सिर्फ कॉपी पेस्ट के भरोसे है। हमें बदलाव करना होगा उस प्रवृत्ति में, जो जिंदगी को जटिल बनाती है। उल्फत सर ने कहा, जीवन को सरल बनाओ और खुशी खुशी जियो।

      

मैं आपको बता दूं कि हम आज अंघेला हिल्स ग्रीन स्कूल से सुबह मसूरी की वादियों को देखने चले गए। मसूरी और आसपास हमने क्या देखा, इसके बारे में आपको जल्द ही बताएंगे। मसूरी से शाम को हम मानव भारती स्कूल, देहरादून पहुंचे। हम सभी बच्चे और शिक्षक काफी थके हुए थे। हमको फेमस थियेटर डायरेक्टर, एक्टर, राइटर, म्यूजिशियन आलोक उल्फत सर से मुलाकात करनी है। टीचर ने हमें उनके बारे में काफी कुछ बताया था।

हम लंबे सफर से थे। आलोक उल्फत सर के मानव भारती पहुंचने से पहले ही हमें हॉल में बैठने को कहा गया। आलोक सर का वेलकम किया गया। उन्होंने दीप जलाने के लिए बच्चों को बुलाया, मुझे बहुत अच्छा लगा। उन्होंने मंच पर आते ही सबसे पहले हमें जगाने का काम किया। हम सो नहीं रहे थे, हम जाग रहे थे, पर थकान बहुत थी, इसलिए कोई कुर्सी पर ठीक से बैठ नहीं पा रहा था। मुझे लगता है उन्होंने देख लिए थे हम सभी बच्चों के चेहरे। ऐसा हो भी क्यों न, उनके पास वो जादू है कि एक मुलाकात में ही बच्चे उनके फैन हो जाते हैं। ऐसा हुआ भी।

उन्होंने एक्टीविटी शुरू करते हुए हमसे कहा, मेरे साथ ताली बजाओ। जैसे मैं बजा रहा हूं, वैसे ही। उन्होंने एक ताली बजाई तो बच्चे अलर्ट हो गए और एक की जगह किसी ने एक, किसी ने दो तो कोई तीन तालियां बजा गया। हम क्या, हमारे टीचर भी ऐसा कर रहे थे। आलोक सर ने फिर कहा, अच्छा तो एक बार फिर ताली बजाओ, जैसे मैं बजा रहा हूं। इस बार उन्होंने दो बार ताली बजाई, लेकिन ऑडियन्स यानी हम सब बच्चे कहां रूकने वाले थे, हमने फिर गलती कर दी और उनके बाद भी तालियां बजाते रहे। ऐसा दो तीन बार चला तो सब बच्चे हंसने लगे। धीरे धीरे हमारी थकान छू मंतर हो गई और हमें आलोक सर के साथ एक्टीविटी में मजा आने लगा।

उन्होंने कुछ बच्चों को मंच पर बुलाया और कहा, चलो आप बजाओ तालियां और सामने बैठे सभी बच्चे आपके हिसाब से तालियां बजाएंगे।  जब उन्होंने एक बच्चे को ताली बजाने के लिए मंच पर बुलाया तो वो शरमाने लगा। उन्होंने कहा कि आपको डरना नहीं है, अपने भीतर कान्फिडेन्स पैदा करना होगा। उन्होंने स्वयं को बच्चों के साथ जोड़ने के लिए मजेदार एक्टिंग की तो बच्चे अपने आप ही मंच पर आने लगे। बार बार दोहराने के बाद ही सभी एक साथ तालियां बजा पाए। आलोक सर ने एक बात कही, एक साथ ताली नहीं बजा सकते तो एक साथ चलेंगे कैसे। मैं इसका मतलब समझा कि आपको साथ साथ चलने के लिए एक दूसरे को समझना होगा।

इसके बाद उन्होंने पूछा कि लीडर कौन होता है, जो सबको साथ लेकर चले या धोखा दे। सबने एक साथ जवाब दिया, सबको साथ लेकर चलने वाला ही लीडर होता है। आलोक सर ने पूछा, किसी ली़डर को जानते हो। बच्चे बोले, धोनी को। किसी ने कहा, विराट कोहली लीडर है।

उन्होंने एक दूसरी एक्टीविटी के लिए 15 बच्चों को मंच पर बुलाया और उनको एक लाइन में खड़ा कर दिया। एक बच्चे से पूछा, तुमको आगे क्या दिख रहा है, उसने कहा सिर। दूसरे ने कहा, मुझे भी सिर दिख रहा है। तीसरा बच्चा बोला, मुझे सामने लाइट दिख रही है। इसके बाद सभी बच्चों को सर्कल में खड़ा कर दिया और पूछा अब तुम्हें क्या दिख रहा है। एक ने जवाब दिया, मुझे मेरा दोस्त दिख रहा है। एक बेटी ने कहा, मुझे भैया दिख रहे हैं। दूसरी ने भी कहा, मुझे भैया दिख रहे हैं। एक बच्चा बोला, मुझे सारे बच्चे दिख रहे हैं। किसी ने कुछ तो किसी ने कुछ और जवाब दिया। एक बच्चे का जवाब था, मुझे तो यहां यूनिटी दिख रही है।

आलोक सर ने कहा, सीखने और जानने के लिए गोल घेरा बनाना जरूरी है। हम एक दूसरे की आंखों में देख सकते हैं। यहां सब एक दूसरे को देख सकते हैं, लाइन में कोई किसी को नहीं देख सकता है, केवल सिर ही दिखता है। आंखों में देखो। क्या तुम्हें पता है कि आंखों में देखकर ही मालूम हो जाता है कि कोई कितना खुश है या नाराज। हां, एक दूसरे को देखकर बोलना, यानी रीपिटिशन से भी सीखते हैं। वह बोले, हम जैसे एजुकेट होते गए, जिंदगी से दूर होते गए। गोल घेरे में बैठकर लगता है कि हम साथ साथ हैं।

अपने दोस्त का नाम लेकर उन्होंने एक बात बताई, जो मुझे तो बहुत अच्छी लगी। आलोक सर ने बताया कि मेरा दोस्त स्कूल से घर आता तो मां घर पर नहीं मिलती तो वह पड़ोस वाली आंटी के घर चला जाता। आंटी उसे खाना खिलातीं और वह उनके घर पर ही सो जाता। सोकर उठता तो पड़ोस वाली दूसरी आंटी के घर चल जाता। वह आंटी उससे कहती, तेरी आंखें लाल हो गई हैं और सो ले। वह उनके घर पर ही सो जाता। सोकर उठता तो एक और आंटी के घर चला जाता। आंटी उसका होमवर्क करा देतीं। शाम को अंकल घर आने पर उसका होमवर्क चेक कर देते। शाम को मां घर पहुंच जाती तो वह अपने घर चला जाता। बच्चे इसी तरह पला करते थे। मोहल्ले के सारे बच्चे इसी तरह एक दूसरे के घर खाते, पढ़ते पल जाते थे। वो कम्युनिटी में रहकर काफी कुछ सीखते थे। कम्युनिटी के सर्कल में पलने बढ़ने वाला बच्चा आगे चलकर बड़ा काम करता है। लाइन का क्या है, हम एक दूसरे को देख भी नहीं पाते। लाइन बिल जमा करने के लिए, फार्म जमा करने के लिए सही है। 

एक बात और, पहले किसी से घर का पता पूछते थे तो बताता था कि पीपल के पेड़ के पास। उनके घर के पास या फिर जहां हवा तेज चलती है वहां रहता हूं। आज के एड्रेस केवल एक व्यक्ति का पता बताते हैं, उसके आसपास क्या हो रहा है, उसके पड़ोस का हाल नहीं बताते। हम एक जगह होकर रह गए। इसमें कम्युनिटी कहां है। किसी अपार्टमेंट, कॉलोनी में कोई

अपने पड़ोसी को नहीं जानता और न ही वास्ता रखना चाहता है। टीचर और स्टूडेंट पर उन्होंने कहा कि बच्चे तो अपने टीचर के दिल में होने चाहिए। टीचर मुस्कराते रहें, यह बच्चों की जिम्मेदारी है। अपने टीचर से उनका हाल पूछो। हो सके तो अपने टीचर को लेटर भी लिख दो।

उन्होंने बच्चों से कहा, मैं तुम्हें गाना सुनाता हूं। मेरे साथ गाना गाएं। उन्होंने कहा कि अगर हम एक साथ गा सकते हैं तो एक साथ बदलाव भी ला सकते हैं। यह फ्रेंच गाना तो मेरी समझ में नहीं आया, पर उसके बोल जो मैं बोल सकती थी, मैंने उनके साथ दोहराए। इस गाने के बोल ने हमें खूब हंसाया। मानवभारती स्कूल पटना की श्रीमोयी ने गाना सुनाया, जिसके बोल हैं- सारी उम्र हम मर मर के जीये। एक पल तो हमें जीने दो…. सुनाया। वाह क्या गाया, श्रीमोयी ने।

आलोक सर ने हमसे गानों के बोल पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भाषा जितनी ज्यादा सरल होगी, उतनी ज्यादा समझ में आएगी। इसी तरह वो गाने, जिनके बोल बहुत सिंपल हैं, काफी पसंद किए गए। लाइफ में कांप्लेक्सिटी नहीं होनी चाहिए। लाइफ को सिंपल बनाएं, ज्यादा खुश रहेंगे।

उन्होंने कहा कि मानवभारती बहुत बड़ा आइडिया है, जो पूरे विश्व के सबसे बेहतर विचारों को लेकर आगे बढ़ रहा है। आपकी आत्मा अच्छी होगी तो आपका शरीर भी स्वस्थ रहेगा। आप मानवभारती का साथ कभी नहीं छोड़ना। आप बड़े होकर तरक्की करो और मानवभारती के लिए कुछ करना। इसके साथ ही उन्होंने और भी बहुत सारी बातें बड़े शानदार अंदाज में बताई। उन्होंने उत्तराखंड बिहार कम्युनिटी इंगेजमेंट प्रोग्राम 2019 की जर्नी को बताती किताबों के बाहर का विमोचन किया। हम बच्चे तो आपके जबर्दस्त फैन हो गए आलोक सर। आप पटना आएं और हमारे और दोस्तों से भी मिलो। बड़ा मजा आएगा।

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